दो महीने में पहला मास होगा ज्येष्ठ माह
यह महीना भगवान की पूजा आराधना व्रत कथा श्रवण इत्यादि के लिए आरक्षित होता है। अधिक मास के पूजन में यह विधि यह की गंध पुष्प युक्त से श्री सूक्त के मंत्र के साथ भगवान के नामों का एक-एक उच्चारण करते हुए उनको पुष्प अर्पित करना चाहिए।
मलमास में गोब्राम्हण साधु संतों की सेवा करनी चाहिए।
पं. मूलचंद शास्त्री ने बताया कि पूरे मलमास में रोज खाद्य पदार्थ 33 बांटना चाहिए जैसे 33 जलेबी 33 मालपुआ इमरती। अधिक माकी अमावस्या 13 जून 2018 को पूर्ण होगा। 30 दिन 33 मालपुआ को लाल कपड़े में बांधकर कांसे के पात्र में रखकर दान करना चाहिए। इससे सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
अधिक जेष्ठ मास प्रारंभ 16 मई से 13 जून तक रहेगा। 13 मई से 13 जून तक विवाह शादी गृह प्रवेश गृह निर्माण भूमि पूजन जलवा, कुआं पूजन आदि शुभ कार्य वर्जित रहेंगे
अधिक मास की रोचक कथा
ज्योतिषाचार्य के अनुसार पुराणों में अधिक मास यानी कि मलमास के पुरुषोत्तम मास बनने की बड़ी ही रोचक कथा है। स्वामीविहीन होने के कारण अधिक मास को मलमास कहने से उसकी बड़ी निंदा होने लगी। इस बात से दुखी होकर मलमास श्रीहरि विष्णु के पास गया और उनसे दुखड़ा रोया। श्रीहरि उसे लेकर गोलोक पहुंच।
वहां श्रीकृष्ण विराजमान थे करुणा सिंधु भगवान कृष्ण ? ने मलमास की व्यथा जानकर उसे वरदान दिया अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूं इससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाविष्ट हो जाएंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से विख्यात हूं और मैं तुम्हे अपना यही नाम दे रहा हूं। इसलिए मलमास के बजाए पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।