न्यायाधीश अरविंद सिंह चंदेल की एकल बेंच में याचिका पर सुनवाई
कोरबा. शातिर ठग शंकरलाल रजक पर कानून का शिकंजा कसने लगा है। हाइकोर्ट ने शंकरलाल की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दी है। इससे ठग शंकर की मुश्किले बढ़ गई है। समर्पण के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए शंकरलाल ने बिलासपुर हाइकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। न्यायाधीश अरविंद सिंह चंदेल की एकल बेंच में याचिका पर सुनवाई हुई।
अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर दलिल पेश की गई। अभियोजन के पक्ष के अधिवक्ता राजीव श्रीवास ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के बाद शंकरलाल की अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया है। प्रकरण गुण दोष के आधार पर खारिज हुआ है। शंकरलाल के पास समर्पण के अलावा फिलहाल को कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
शंकरलाल के खिलाफ दीपका थाने में अपराध क्रमांक 63/18 और 68/18 पर धोखाधड़ी और दस्तावेज में कूटरचना के दो केस दर्ज हैं। शंकर और उसके गिरोह पर एक करोड़ रुपए से अधिक की ठगी का आरोप है। शंकर को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस कोशिश कर रही है। इसबीच आरोपी ने अधिवक्ता के जरिए नीचली अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। नीचली अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया था। शंकर ने हाइकोर्ट की शरण ली थी। लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। बताया जाता है कि याचिका गुण दोष के आधार पर खारिज हुई है। इस कारण आरोपी अगले छह माह तक कोई याचिका दायर नहीं कर सकते हैं।
दोनों पुत्रों की याचिका खारिज
शंकर ही नहीं उसके दोनों पुत्र रवि और अजय रजक को भी कोर्ट से राहत नहीं मिली है। रवि और अजय ने भी बेल के लिए कटघोरा की कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों की याचिका खारिज कर दी है। बता दे कि कटघोरा के ग्राम हुकरा में रहने वाले शंकरलाल रजक, उसके पुत्र रवि व अजय सहित अन्य आरोपियों पर धोखाधड़ी के 10 केस दर्ज हैं।