- बिजली की मांग व आपूर्ति में रखना होगा सामंजस्य -बूढ़े हो गए दो संयंत्र, लगातार नहीं चल पाती इकाइयां
कोरबा छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादन कंपनी में नए एमडी की पदस्थापना की जा रही है। एनटीपीसी के क्षेत्रीय ईडी केआरसी मूर्ति का चयन इस पद के लिए किया गया है। इनके समक्ष प्रदेश में बिजली की मांग व आपूर्ति में सामंजस्य बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। दो संयंत्र बूढ़े हो चले हैं। इनमें एक संयंत्र की इकाइयां यदा कदा बंद ही रहती है। दूसरे संयंत्र को नवीनीकरण की जरुरत है।
कोरबा पूर्व संयंत्र की हालत खराब
उत्पादन कंपनी के 440 मेगावाट क्षमता वाले कोरबा पूर्व संयंत्र में 50 मेगावाट की चार व 120 मेगावाट की दो इकाई स्थापित है। 50 मेगावाट की पहली इकाई 1966 में स्थापित की गई। इसके बाद एक-एक करके 50 मेगावाट की तीन इकाई और स्थापित की गई। 1976 में 120 मेगावाट की एक इकाई व इसके बाद दूसरी इकाई से उत्पादन लिया गया। 26 वर्ष पूर्ण होने पर लगभग 370 करोड़ की लागत से इकाइयों का नवीनीकरण कराया गया। तब से यहां की इकाइयां अपनी स्थापित क्षमता के अनुसार चल रही थी।
समय बीतने के साथ ही इकाइयां बूढ़ी होती गई। इसका परिणाम यह सामने आया कि इकाइयां लगातार नहीं चल पा रही है। शहर के नजदीक होने के कारण प्रदूषण की समस्या हावी हो गई है। सबसे सस्ती बिजली होने के कारण उत्पादन कंपनी इकाइयों को चला रही है। ऐन समय पर यहां की बिजली भी काम आती है। अब तो पुराने संयंत्र के स्थान पर नया संयंत्र लगाना ही समस्या का स्थाई हल माना जा रहा है। हालांकि इस दिशा में अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
एचटीपीपी में नवीनीकरण आवश्यक
उत्पादन कंपनी का दूसरा पुराना संयंत्र एचटीपीपी है। इसकी उत्पादन क्षमता ८४० मेगावाट है। २१० मेगावाट की चार इकाइयां स्थापित है। संयंत्र की पहली इकाई १९८३ में स्थापित की गई। १९८६ में चारों इकाइयों से बिजली का उत्पादन लिया गया। तब लेकर आज तक इकाइयों का संचालन किया जा रहा है। कायदे से २५ वर्ष पूरा होने पर इकाइयों का नवीनीकरण होना चाहिए। बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए इकाइयों को बंद नहीं किया गया। इससे यहां की इकाइयों में भी ट्रिपिंग की समस्या बढ़ रही है। वर्तमान में यहां की बिजली मिलाकर ही मांग व आपूर्ति में सामंजस्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
बिजली की मांग चार हजार मेगावाट
प्रदेश में अभी बिजली की मांग पिकआवर में ३७०० मेगावाट तक जा रही है। गर्मी बढऩे के साथ ही मांग में और वृद्धि होगी। इससे यह माना जा रहा है कि बिजली की मांग चार हजार मेगावाट को पार कर जाएगी। अभी उत्पादन कंपनी द्वारा नए व पुराने संयंत्रों के अलावाा सेंट्रल सेक्टर शेयर से बिजली लेकर काम चलाया जा रहा है। मांग बढऩे पर अधिक बिजली लेनी पड़ेगी।