- प्रकृति ही हमारा बेस्ट फ्रेंड - दोस्ती के खास पलों को किया साझा -फ्रेंडशिप डे पर हुई चर्चा
कोरबा. फैमिली फ्रेंड्स गु्रप के सदस्य फें्रडशिप डे के अवसर पर पौधरोपण करेंगे। पौधों के किशोर अवस्था होने तक संरक्षण करने का निर्णय लिया है। इस गु्रप में लगभग सौ सदस्य हैं। इन दोस्तों के गु्रप का यह पहला फ्रेंडशिप डे है। आज की युवा पीढ़ी चाहती है कि आने वाली पीढ़ी इस प्रकृति को सौंदर्य देख सके। इसलिए युवा स्वयं के खर्चे से पौधे खरीदेंगे और फे्रंडशिप डे पर पौध रोपण करेंगे। इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है।
पत्रिका डॉटकाम से ओपन थिएटर में गु्रप के साथ चर्चा के दौरान ममता खरसन, प्रिया विश्वकर्मा, सोनिया वर्मा, किरती ङ्क्षसह, कवि दास, जाहिर अली, हसनैन खान, विनय गोस्वामी ने अपनी दोस्ती के पल साझा किये। इस युवा पीढ़ी का भाव कुछ अलग ही कहता है कि दोस्ती ढाई अक्षर से बनी है, लेकिन इसे निभाना बहुत कठिन है। प्रकृति को हम बेस्ट फे्रंड कह सकते हैं। क्योंकि यह हमारे जीवन के प्रारंभ से लेकर अंतिम क्षणों तक साथ देती है। इसके बदले में पौधे हमसे कोई अपेक्षा नहीं रखते। आज का जनरेशन डिजिटल हो गया है। सोशल मीडिया का जमाना है। फे्रंड्स को फोटो व मैसेजेस शेयर तक ही सीमित रह गया है, लेकिन इस फें्रडशिप डे की शुरुआत पौधरोपण करेंगे। संरक्षण करने का संकल्प लेंगे। इसके उपरांत एक-दूसरे के हाथों की कलाई पर फे्रंडशिप बैंड बांधकर दोस्ती का वादा करेंगे।
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दोस्ती के एक पल
पत्रिका डॉटकाम से कहा कि वे लोग दोस्ती का एक पल कभी भुला नहीं पाएंगे। ममता खरसन ने बताया कि एक फे्रंड की मां गंभीर बीमारी के कारण वैल्लूर के एक अस्पताल में भर्ती किया गया था। उनका इलाज के दौरान निधन हो गया था। लेकिन इसकी जानकारी फें्रड को नहीं थी। हमारे दोस्तों ने इस बात घर पहुंचते तक नहीं बताने का निर्णय लिया। घर पहुंचने के एक घंटे बाद घटना की जानकारी दी गई। सभी दोस्तों ने मिलकर ढांढस बांधा।
इनकी दोस्ती 17 साल पुरानी
्िरप्रया वर्मा और सोनिया वर्मा दोनों की फें्रडशिप 17 साल की हो जाएगी। । इन 17 सालों में सुख व दुख के समय साथ देना, मौज-मस्ती करते रहे। हर तरह से मदद करने की कोशिश करते हैं।
बहन की सहायता
कवि दास ने पत्रिका डॉटकाम से एक पल साझा किया, जिसे उसको अब तक की सबसे खुशी महसूस होता हैं कि वह दोस्त के मुसीबत के समय काम आया। दोस्त की दीदी के गर्भावस्था के दौरान आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था। इस दौरान उसने किसी तरह से आर्थिक सहायता किया था।