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World Breastfeeding Week 2018 : नवजात के लिए अमृत से कम नहीं होता मां का पहला दूध, दो विभाग मिल कर मना रहे स्तनपान सप्ताह

स्तनपान सप्ताह मनाए जाने का उद्देश्य महिलाओं को स्तनपान की सही जानकारी प्रदान के करने के साथ ही इस दिशा में जागरूक करना है।

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कोरबा

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Shiv Singh

Aug 02, 2018

World Breastfeeding Week 2018 : नवजात के लिए अमृत से कम नहीं होता मां का पहला दूध, दो विभाग मिल कर मना रहे स्तनपान सप्ताह

World Breastfeeding Week 2018 : नवजात के लिए अमृत से कम नहीं होता मां का पहला दूध, दो विभाग मिल कर मना रहे स्तनपान सप्ताह

कोरबा. विश्व स्तनपान सप्ताह प्रत्येक वर्ष अगस्त माह के पहले सप्ताह में मनाया जाता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार जन्म के एक घंटे के अंदर मात्र 44 प्रतिशत शिशु ही मां के गाढ़ा पीला दूध का सेवन कर पाते हैं। जबकि जिले के अधिकारी कहते हैं कि कोरबा में संस्थागत प्रसव 98 फीसदी होने के कारण 90 फीसदी से ज्यादा बच्चों को एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) दिया जाता है।

स्तनपान सप्ताह मनाए जाने का उद्देश्य महिलाओं को स्तनपान की सही जानकारी प्रदान के करने के साथ ही इस दिशा में जागरूक करना है। जिले में स्वास्थ्य व महिला बाल विकास विभाग इस दिशा में मिल कर कार्य कर रहे हैं।

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सभी का सहयोग जरूरी तभी मिलेगी सफलता
महिला बात विकास के कार्यक्रम अधिकारी आनंद प्रकाश किसपोटट्टा ने बताया कि जिले में एक से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान दिवस मनाया जा रहा है। स्तनपान विषय में आम जागरूकता बढ़ाने की जरूरत भी है। यदि महिलाएं स्तनपान के फ़ायदों से अवगत होंगी तभी इसमें इजाफ़ा हो सकता है। डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के अनुसार नवजात शिशु के लिए पीला गाढ़ा चिपचिपा युक्त मां का के स्तन का दूध कोलेस्ट्रम संपूर्ण आहार होता है जिसे बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर ही शुरू कर देना चाहिए। सामान्यत: बच्चे को 6 महीने की अवस्था तक स्तनपान कराने की अनुशंसा की जाती है। शिशु को 6 महीने की अवस्था और दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ पौष्टिक पूरक आहार भी देना चाहिए ।

कुपोषण से लड़ाई में कोलेस्ट्रम बेहद अहम
मां का पहला दूध कोलेस्ट्रम कुपोषण से लड़ाई के लिए बेहद अहम हथियार है। इससे नवजात शिशु के लिए सभी जरूरी पोषक तत्व होते हैं। शारीरिक व मानसिक विकास के लिए यह बेहद जरूरी है। इसलिए स्वास्थ्य के साथ ही महिला बाल विकास विभाग द्वार जागरुकता के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सप्ताह भर मितानिन, एएनएम व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं सहित महिला बाल विकास के अमले द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्र, परियोजना कार्यालयों में जागरुकता कार्यक्रम चालाए जा रहे हैं।

हजार में 48 है शिशु मृत्यु दर
बिलासपुर संभाग के शिशु मृत्यु दर है प्रति हजार ४८ है। चूंकि इस आंकड़े की गणना कम से कम एक लाख प्रसव के आधार पर की जाती है, जिसके कारण अकेले कोरबा जिले के लिए इस आंकड़े की अनुपलब्धता की जानकारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई है। जिसका मतलब यह हुआ कि हर हजार नवजात बच्चों के जन्म में से ४८ की मौत हो जाती है। इसी तरह मातृ मृत्यु दर की बात की जाए तो संभाग में प्रति १० हजार महिलाओं पर २६१ है, हर १० महिलाओं में से २६१ महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान होती है। यह आंकड़ा भी बिलासपुर संभाग का है।

स्पनपान में इस तरह के रोड़े
-आदिवासी सहित कुछ लोग कुरीतियों से जकड़े हुए हैं, पहला दूध फेंकने की प्रथा है।
-चौक-चौराहों या सार्वजनिक स्थानों पर वात्सल्य गृह का अभाव
-सरकारी व दफ्तरों में भी नहीं होती कोई व्यवस्था
-अनियमित दिनचर्या भी है नियमित स्तनपान नहीं करा पाने का कारण

जिले में स्तनपान की स्थिति संतोषजनक है। संस्थागत प्रसव के आंकड़े ९८ फीसदी हैं। इसलिए जन्म के घंटे भर के भीतर ही नवजात को मां का पहला दूध कोलेस्ट्रम पिलाया जाता है। कामकाजी महिलाओं की संख्या भी ज्यादा नहीं है। अंधविश्वास पर भी अब लोग ज्यादा भरोसा नहीं करते। फिलहाल ७वें व ८वें महीने की गर्भवती महिलाओं को स्तनपान की सही प्रक्रिया के विषय में जागरूक कर रहे हैं। पद्माकर शिंदे, डीपीएम, एनएमएच कोरबा

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