Child line: बाल श्रमिकों से थ्रेसर पर काम कराने का मामला उजागर हुआ है। चाइल्ड लाइन (Child Line) ने पुलिस के सहयोग से तीन बाल श्रमिकों को छुड़ा लिया है। उन्हें माता-पिता के हवाले कर दिया है।
कोरबा. विकासखंड करतला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खुटाकूड़ा के थ्रेसर मशीन पर पैरा कटाई का काम चल रहा था। यह काम तीन बाल श्रमिकों से लिया जा रहा था। इसकी सूचना चाइल्ड लाइन को मिली। टीम ने घेराबंदी की। पुलिस के साथ चाइल्ड लाइन की टीम खुटाकूड़ा रवाना हुई। टीम ने मौके पर पहुंचकर थ्रेसर मालिक से पूछताछ की। उसने नाबालिग के काम पर रखने से मना किया। टीम को पता चला कि पुलिस को देखकर थ्रेसर मालिक ने नाबालिग बच्चों को जंगल में छिपा दिया है। टीम ने थोड़ी देर तक इंतजार किया। थ्रेसर पर काम करने वाले अन्य मजदूर और ग्रामीणों की मदद से जंगल में छिपे बाल श्रमिकों को बरामद कर लिया।
इसकी सूचना बच्चों के माता-पिता को दी गई। उन्हें बुलाकर नाबालिग को सौंप दिया। नाबालिग बच्चों के माता-पिता ने टीम को बताया कि उन्होंने काम के लिए बच्चों को नहीं भेजा था। गांव में रहने वाले एक व्यक्ति के बहकावे में आकर नाबालिग घर छोड़कर बस से बाहर चले गए। पिछले 14 दिन से थ्रेसर पर काम कर रहे थे। चाइल्ड लाइन की टीम ने बच्चों के बरामद होने की सूचना करतला थाने को दी है।
थ्रेसर मालिक फरार
इधर, टीम के पहुंचने पर थ्रेसर मालिक पुलिस से बचकर फरार हो गया। टीम ने बाल श्रमिकों का बयान दर्ज किया है। इसमें पता चला है कि थ्रेसर मालिक करतला से पहले रायगढ़ जिले में काम करा रहा था। प्रतिदिन २०० रुपए की दर से मजदूरी भुगतान का वादा किया था, लेकिन रुपए का भुगतान नहीं कर रहा था। बाल श्रमिकों ने थ्र्रेसर मालिक पर गाली गलौज का आरोप भी बयान में लगाया है।
14 साल से कम उम्र
14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना बाल श्रमिक कानून के दायरे में आता है। हालांकि बच्चे इस उम्र में माता-पिता का सहयोग कर सकते हैं। कानूनी प्रवधान के अनुसार 18 वर्ष से कम किशोर से खतरनाक काम नहीं कराया जा सकता है।