कोरबा

CG Assembly Elections : यहां की जनता ने डिप्टी सीएम से लेकर गृहमंत्री तक दिये, पर सुविधा के नाम पर ये मिला…

- हजारों किसानों की फसल रौंद दी गई, लेकिन सरकार ने कोई ठोस उपाय नहीं किए।

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Oct 12, 2018
CG Assembly Elections : यहां की जनता ने डिप्टी सीएम से लेकर गृहमंत्री तक दिये, पर सुविधा के नाम पर ये मिला...

कोरबा. रामपुर की माटी का सियासी मिजाज एक ही बात कह रहा है, हमनें तो कांग्रेस का भी साथ दिया, बीजेपी को भी सिर माथे पर बिठाया। हमारे विधानसभा क्षेत्र ने डिप्टी सीएम और छत्तीसगढ़ बनने के बाद गृहमंत्री तक दिया। लेकिन क्षेत्र की जनता को मिला क्या? सिर्फ ढकोसला और बयानबाजी।

रामपुर विधानसभा का इतिहास रहा है कि वह हमेशा सरकार के साथ रही। जब जिस पार्टी का विधायक बना उसी की सरकार बनी। सरकार बनाने में रामपुर विधानसभा का बड़ा सहयोग रहा है। लेकिन इस इतिहास को क्षेत्र की जनता ने पिछली बार यह रिकार्ड तोड़ दिया। सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और गृहमंत्री ननकीराम कंवर को करारी देखनी पड़ी। रामपुर में कांग्रेस से एक मात्र चेहरा शुरूआत से प्यारेलाल कंवर और भाजपा से ननकीराम कंवर रहे हैं। दोनों ने जीत की हेट्रिक लगाई। १९९३ में प्यारेलाल कंवर अविभाजित एमपी सरकार में डिप्टी सीएम तक बने। आदिवासी दिग्गज चेहरे के डिप्टी सीएम बनने से रामपुर की जनता में खुशी की लहर दौड़ गई।

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वोटिंग और नोटा में अव्वल है
रामपुर विधानसभा की जनता वोटिंग से लेकर नोटा में भी अव्वल है। पिछले बार रिकार्डतोड़ ८४ फीसदी वोटिंग रामपुर में हुई थी। पिछली बार ननकीराम कंवर के खिलाफ जनता ने अपना आक्रोश वोट से दिखाया था। हैट्रिक जमाने के बाद भी ननकी पिछला चुनाव ९ हजार से अधिक वोटों से हार गए थे। नोटा में भी ५८८१ वोट पड़े थे। जनता का मूड कांग्रेस और भाजपा दोनों के खिलाफ है।

ये दो सड़कें पिछले 30 साल में नहीं बनीं
-कुदमुरा से श्यांग लगभग ३० किमी की सड़क के लिए चार बार घोषणा हो चुकी है। सीएम डॉ रमन सिंह ने इसकी घोषणा कर चुके हैं। पिछले चुनाव में ग्रामीणों को वादा किया गया था। अगली बार के चुनाव से पहले बन जाएगी। लेकिन नहीं बनी। विकास यात्रा में सीएम ने फिर से इसकी घोषणा की है।

- लेमरू से सीधे सरगुजा को जोडऩे वाले लामपहाड़ मार्ग के निर्माण के लिए पीडब्लूडी से लेकर सीजीआरडीसीए तक ने सर्वे किया। लेकिन आज तक बड़े-बड़े बोल्डर के बीच लोग गुजर रहे हैं। इसके बन जाने से अंबिकापुर की दूरी ४० किमी तक कम हो सकती है, घोषणा के बाद भी आज तक काम नहीं।

हाथी प्रभावित 21 गांव के ग्रामीणों में आक्रोश
हाथी प्रभावित 21 गांव में सियासी माहौल बेहद गर्म है। ग्रामीणों का मूड इस तरह है कि चुनाव जल्द आ जाएं तो वे अपना हिसाब बराबर कर दें। प्रभावितों का साफ कहना है कि सरकार का एक भी नुमाइंदा आए और यह तो बताएं कि आखिर उन्होनें किया क्या ? पांच साल में रामपुर विधानसभा में 10 से भी अधिक मौतें, सैकड़ों मकान ढह गए। हजारों किसानों की फसल रौंद दी गई। लेकिन सरकार ने कोई ठोस उपाय नहीं किए।

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Published on:
12 Oct 2018 11:15 am
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