वन विभाग हाथी के पास नहीं पहुंच पा रहा
कोरबा. करंट की चपेट में आने से एक नर हाथी की बीती रात ग्राम बेला में मौत हो गई। हाथी की मौत के बाद उसकी एक साथी पांच घंटे से बाजू में खड़े होकर चिंघाड़ मार रही है। जिसकी वजह से वन विभाग हाथी के समीप नहीं पहुंच पा रहा है।
बीते एक माह से दो हाथी एक नर और एक मादा कोरबा वनमंडल में जमकर उत्पात मचा रहे थे। ये दोनों ही हाथी सरगुजा के कई जगह धमाचौकड़ी करने के बाद कोरबा पहुंच गए थे।
लगभग नौ महीने से ये दोनों यहीं अलग-अलग रेंज में जाकर उत्पात कर रहे थे। वन विभाग ने इन्हें वीरू और बसंती का नाम दिया था। यह भी दावा किया था ये दोनो मां और बेटे की जोड़ी है।
हाल ही के कुछ दिनो के भीतर फुटहामुड़ा में दो लोगों को मौत के घाट उतारने के साथ एक दर्जन से अधिक जगह मकानों को भी इन हाथियों ने तोड़ दिया था। पिछले तीन चार दिन से ये दोनों ही हाथी केसलपुर, बालको बेरियर, झगहरा में बार-बार पहुंच रहे थे। मंगलवार को इनके हमले से केसलपुर में दो और दोंदरों में एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया था। बीती रात ये हाथी बेला जा पहुंचे। बेला गांव में एक मकान को तोडऩे के बाद खेत से होते हुए दूसरी तरफ जा रहे थे। बताया जा रहा है कि इसी बीच नर हाथी करंट तार की चपेट में आ गया। जिसकी मौके पर ही मौत हो गई।
हालांकि यह तार कौन सा था करंट कहां से प्रवाहित हो रहा था। इसकी पुष्टी नहीं हो सकी है। घटना के बाद से मादा हाथी शव के पास ही बैठी रही। सुबह जब वन विभाग और लोगों की भीड़ लगने लगी। तो वहां से हटकर थोड़ी दूर पर जाकर चिंघाड़ मारती रही। सुबह से दोपहर 12 बजे तक हाथी के रहने की वजह से वन विभाग मृत हाथी के पास नहीं पहुंच सका है।
ट्रैंक्यूलाइज करने की चल रही थी तैयारी, इससे पहले ही मौत
वन विभाग की टीम ने पिछले दिनों वाइल्ड लाइफ की टीम से इन दोनों ही हाथियों पर रिपोर्ट तैैयार करवाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें एक मादा हाथी है और नर हाथी उसका बच्चा था। नर हाथी की उम्र्र महज 8 साल के आसपास थी। मादा हाथी के सूंड में चावल या फिर धान की महक बहुत जल्दी से आ जाती है। टीम के मुताबिक इन सभी जगहों पर सिर्फ एक ही हाथी ने सबसे अधिक आक्रमकता दिखाई थी। जो कि नर हाथी था।
जिस भी लोकेशन में दोनों हाथी होते हैं, उसके आसपास जहां से भी धान या फिर चावल की महक आ जाती है। मादा हाथी, नर हाथी को साथ पीछे-पीछे वहां तक ले जाती है। फिर उस जगह पर नर हाथी खिड़की, दरवाजा तोड़कर अनाज बाहर निकालता था। दोनों हाथी उसे खाने के बाद चले जाते थे। पीसीसीएफ को नर हाथी को ट्रैक्यूलाइज करने के लिए अनुमति भेजी गई थी। लेकिन उसी बीच यह घटना घट गई।