शौचालय, मनरेगा जैसे कार्यों पर सबसे अधिक धांधली
कोरबा. सरकारी रकम का बंदरबांट करने वाले जन प्रतिनिधियों में दो दर्जन महिला सरपंच कुछ ज्यादा ही दंबग है। सरकारी पैसे हड़पने में माहिर ये महिला सरपंच पिछले 10-15 साल से अफसरों को पैसे लौटाने के लिए घुमा रही हंै। पांचों ब्लॉक का एक जैसा हाल है। पेंशन, पीएम आवास, शौचालय, मनरेगा जैसे कार्यों पर सबसे अधिक धांधली सामने आया है।
गांव-गांव में सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर बनी त्रिस्तरीय मॉनिटरिंग व्यवस्था हर दूसरे गांव में ध्वस्त होती नजर आ रही है। कहीं मर चुके लोगों के नाम पर इंदिरा आवास बना दिया गया है तो कुछ जगह बगैर शौचालय बने पैसा निकाल लिया गया है। कुछ जगह बुजुर्गों के कई महीनों के राशन से लेकर पेंशन की राशि को सरपंच व सचिवों ने दबा दिया था।
हालांकि बाद में मामला सामने आने के बाद वसूली के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है लेकिन इस वसूली में भी घोटालेबाज सरपंचों को कई मौके दिए जा रहे हैं।
पति का हाथ ज्यादा, अब फंस रही पत्नी
एक यह भी पहलू है कि महिला सरपंच नाम के लिए हैं, पति का हस्तक्षेप ज्यादा होता है। गड़बड़ी इन्हीं पति के द्वारा किया जाता है। लेकिन रिकार्ड में नाम सरपंचों का होता है। वसूली आरोप पत्र तय होने से परेशानी बढ़ जाती है।
घोटालेबाजों में पुरूष सरपंच कम
कोरबा जनपद के ही कई गांव के ऐसे सरपंच-सचिव हैं जिन पर सरकारी पैसे का दुरुपयोग साबित तो हो चुका है। लेकिन वसूली के मामले में अफसर शह देने में लगे हुए हैं। इनमें श्यांग के पंचराम राठिया व सुरेश राठिया से 50 हजार, बेला के नैहर सिंह सिदार व कमल सिंह से 28 हजार, अरसेना के नचकार, सुनील गाडिय़ा से 61 हजार, देवपहरी के बैसाखूराम व महेश सिंह से 46 हजार 2002-03 से बकाया है। इनमें से बैसाखूराम ने प्रशासन के पास 17 हजार रूपए जमा कर दिया, बाकी पूरी रकम बकाया है।
सीईओ व बाबू से भी होनी है वसूली
इधर फर्जी बिल पास करने सहित अन्य गड़बड़ी को अंजाम देने वाले आरईएस के एक एसडीओ से भी साढ़े सात लाख रूपए की वसूली होनी है। हालांकि इसमें अभी जांच शेष है इसलिए अधिकारियों के नाम पर आरोप पत्र तय नहीं हुआ है।
-जिन भी सरपंच-सचिवों से वसूली करनी है उनको लगातार नोटिस जारी कर जल्द सरकारी राशि जमा करने को कहा जा रहा है। कई जगह से पैसे अब तक जमा नहीं हुए हैं उन पर कार्रवाई होगी।
-बीएस मरकाम, एसडीएम, कोरबा