नगर निगम द्वारा इस नाले का काम पिछले दो साल से करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन हर बार यह काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
कोरबा . कोरबा शहर के 75 फीसदी इलाके से निकलने वाले ड्रेनेज पानी के लिए प्रस्तावित ४ नाले आने वाली मानसून से पहले बनते नजर नहीं आ रहे हैं। ८ करोड़ रूपए के इन नालों के लिए निगम ने तीसरी बार टेंडर जारी किया है। टेंडर मई में खोलेंगे। वर्कआर्डर होते तक जून हो जाएगा। ऐसे में इस बारिश भी लोगों की परेशानी यथावत रहेगी। सबसे बड़ा और कच्चा नाला नमन विहार से लेकर सीतामणी रेलवे केबिन तक है।
नगर निगम द्वारा इस नाले का काम पिछले दो साल से करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन हर बार यह काम शुरू नहीं हो पा रहा है। पहले फंड की दिक्कत और अब जब पर्याप्त फंड मिल भी गया। तो निगम ने इसके लिए पहली बार टेंडर पिछले मानूसन से पहले किया था। इस नाले को छह पार्ट में बनाना प्रस्तावित है। हर पार्ट की लागत लगभग २-२ करोड़ रूपए की है। कुल 12 करोड़ रूपए में इस नाले का काम होना था।
पूर्व में ठेकेदार ने बिलो रेट पर काम लेने के बाद पहले तो काम ही नहीं किया। फिर काम करने से मना कर दिया। लिहाजा निगम ने आठ करोड़ रूपए के इस कार्य को निरस्त कर दूसरी बार निविदा निकाली। लेकिन इस बार भी बात नहीं बन सकी। और टेंडर को निरस्त करना पड़ा। अब जाकर तीसरी बार टेंडर निकाला गया है। जो कि मई में खुलेगा। ऐसे में जून तक वर्कआर्डर होगा। मानसून में नाले में काम नहीं हो सकेगा। इस तरह आने वाले छह माह बाद ही इस नाले पर काम हो सकेगा। इधर जिन दो नालों पर काम चल रहा है। वह लगभग पूर्णत: की ओर है। क्रासिंग तक काम पूरा होने पर है।
बारिशमें उफनता है नाला, लोग परेशान
टीपीनगर से लेकर मुड़ापार, नमन विहार सहित अन्य क्षेत्रों से बरसाती पानी बहकर इसी नाले पर आकर मिलता है। जो कि अटल आवास के पीछे से रेलवे केबिन से होते हुए सीतामणी पर मिलता है। बरसात का पानी अक्सर कच्चे नाले से उफनते हुए सड़क तक आ जाता है। इस नाले पर कचरे का अंबार लगा रहता है। आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। निगम को उम्मीद थी कि अगले मानसून तक यह काम पूरा हो जाए जिससे लोगों को परेशानी ना हो। पर ठेकेदार की वजह से अब इसमें विलंब होगा।