
टॉपिक ऑफ द डे
कोरबा . औद्योगिक नगरी की सबसे बड़ी समस्या सड़क हादसे हैं। प्रति वर्ष बड़ी संख्या में लोग काल कवलित हो रहे हैं। ये बहुत ही दु:खद स्थिति है। हादसे की वजहें जानने और इन्हें रोकने के लिए इंटीग्रेटेड तरीके से काम हो रहा है। जहां तक आपराधिक घटनाओं की बात है, उन्हें अंजाम देने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है और जेल के सीखचों में कैद हो रहे हैं। यह कहना है कि कोरबा के एसपी मयंक श्रीवास्तव का।
श्रीवास्तव गुरुवार को पत्रिका डॉटकाम द्वारा आयोजित टॉपिक ऑफ दे डे में बतौर मेहमान शामिल हुए। उन्होंने सड़क हादसों, कम्युनिटी पुलिस सहित कई विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि पुलिस की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही बड़े से बड़े अपराधियों के हौसले पस्त होते हैं और अपराधी कहीं भी छुपा हो ? पुलिस ढूंढ कर जेल के सीखचों में कैद कर ही देती है। शायद इसी कारण कहा जाता है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं।
उन्होंने कहा कि जिले की सबसे बड़ी समस्या हादसों की संख्या है और प्रति वर्ष बड़ी संख्या में लोग काल कवलित हो रहे हैं। यह बहुत दु:खद है। हादसों को रोकने के लिए इंटीग्रेटेड सिस्टम से काम हो रहा है। उन्होंने संक्षेप में हादसों की वजहें बतायी कि कभी चालक शराब पीकर चलाते हैं तो कभी सड़क के किनारे खड़े वाहनों से टकरा कर हादसे होते हैं। सड़क किनारे रिहायशी बस्ती होने से कई बार अचानक सड़क पर राहगीर के आने से हादसे होते हैं। कहीं सड़क ठीक नहीं बनी तो कहीं अंधा मोड़ और अंधेरा है। उन्होनें बताया कि इन सब वजहों को चिह्नित करने के साथ-साथ इन्हें दूर भी किया जा रहा है। ड्राइवरों व हेल्परों को भी समझाइश दी जा रही है।
कम्युनिटी पुलिसिंग पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गांवों में शराब की अवैध बिक्री से सबसे अधिक महिलाएं प्रभावित हैं, इसलिए जब प्रभावित समाज इन चीजों को रोकने के लिए आगे आएगा तो इसका असर दिखेगा और शराब बंद होगी। पुलिस इसे कानून के अलावा जागरुकता से ठीक करने के पक्ष में है।
स्टूडेंट्स-युवा भी समझें
मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि सड़क सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत स्कूलों-कालेजों में यातयात के नियम बताए जा रहे हैं। इन्हें फॅालो करने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवा ही आगे चलकर डिसीजन मेकर हैं। इसलिए अगर इस समय उन्हें कानून के अनुसार चलने की सीख दी गयी और उन्हें अमल किया तो सभी के लिए बेहतर होगा।
दिया सक्सेस मंंत्र
आईपीएस मयंक श्रीवास्तव ने सिविल सर्विसेज की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों-युवाओं के लिए भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वे सबसे पहले यह समझें कि एक्जाम उनसे क्या चाहता है ? फिर उसी के अनुरूप अध्ययन क रें। अधिक से अधिक समय दें और मेहनत के साथ तैयारी करें तो न केवल सिविल सर्विसेज में बल्कि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलेगी।
Published on:
26 Apr 2018 09:41 pm
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