जिले के 26 केन्द्रों में दो हजार से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कोरबा . शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत अब प्राथमिक व माध्यमिक स्तर के सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। इसके तहत एनआईओएस द्वारा जिले के 26 केन्द्रों में दो हजार से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन निजी स्कूलों में कल तक दो शिक्षक थे, वहां एनआईओएस का प्रशिक्षण शुरू होते ही कार्यरत शिक्षकों की संख्या बढ़ कर 10 हो गई। विभाग भी इन्हें बेरोक-टोक प्रशिक्षण दे रहा है। जानकारी सामने के बाद अब जाकर डाईट ने स्थानीय स्तर पर समन्वयक की जिम्मेदारी देने संभाल रहे प्राचार्यों को जांच के निर्देश दिए हैं।
सभी राज्यों में संचालित निजी और शासकीय स्कूलों में अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिए डीएलएड कोर्स को अनिवार्य कर दिया गया है। इस कोर्स को न करने वाले शिक्षक आगे अपनी सेवाएं नहीं दे पाएंगें। रियायत दर पर डीएलएड का कोर्स स्कूल के शिक्षकों के लिए कराया जा रहा है। इसमें कुछ निजी स्कूलों से जुड़े लोगों ने स्कूल शिक्षक नहीं होने के बाद भी अपने रिश्ते नातेदारों का पंजीयन करा दिया है। जो बतौर स्कूल शिक्षक की तरह रियायत दर पर कोर्स कर रहे है। जिसके कारण जिले में इस कोर्स को करने वाले शिक्षकों की भारी संख्या है। एनआईओएस द्वारा कराए जा रहे प्रशिक्षण में ज्यादातर निजी स्कूल के प्रशिक्षार्थी है।
आपस नहीं है समन्वय इसलिए नहीं होती जांच
जिले के निजी स्कूल में कितने शिक्षक कार्यरत हैं। इसका आंकड़ा शिक्षा विभाग के पास मौजूद है। हर साल शालाओं के नवीनीकरण का काम सत्र की शुरूआत में किया जाता है। इस आवेदन में निजी स्कूल शाला में कार्यरत शिक्षकों की संख्या भी दर्ज होती है जबकि एनआईओएस के लिए ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन अक्टूबर-सितंबर २०१७ में किया गया था। शिक्षा विभाग से आंकड़ों से डाईट द्वारा तस्दीक की जा सकती है। लेकिन आपसी समन्वय व विभागीय उदासीनता के कारण यह काम नहीं हुआ।
डाईट प्राचार्य हैं नोडल अधिकारी
एनआईओएस के तहत दिए जा रहे प्रशिक्षण के लिए जिला स्तर पर नोडल अधिकारी डाईट के प्राचार्य को बनाया गया है जबकि स्थानीय स्तर पर जिन स्कूलों के प्रशिक्षण के लिए केन्द्र बनाया गया है। वहां के प्राचार्य को केन्द्र समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है। स्कूल के ही एक सीनियर शिक्षक को सीनियर रिसोर्स पर्सन भी बनाया गया है। स्थानीय स्तर पर भी रवैया ढीला होने के कारण एडमिशन आसानी से मिल गया है। चूंकि यह प्रशिक्षण कार्यरत शिक्षकों के लिए है। इसलिए संपर्क कक्षाएं केवल छुट्टियों वाले दिन ही संचालित की जाती है। लेकिन ज्यादातर केन्द्रों के प्राचार्य छुट्टी वाले स्कूल जाते ही नहीं।