बीएमओ द्वारा मेडिकल ऑफिसर को पीएम करने का लिखित आदेश किया गया था जारी, डॉक्टर के इस रवैय्ये से आक्रोशित हैं ग्रामीण
सोनहत. एक ग्रामीण ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। 25 जून की सुबह उसके परिजन पीएम कराने लाश लेकर अस्पताल पहुंचे थे। मामले में बीएमओ ने मेडिकल ऑफिसर को पीएम करने का लिखित आदेश जारी किया था लेकिन डॉक्टर ने इसकी अनदेखी कर दी।
8 घंटे तक लाश पीएम हाउस में ही पड़ी रही। मीडियाकर्मियों की दखल के बाद बीएमओ ने खुद पीएम किया तथा रिपोर्ट सौंपी। इधर डॉक्टर की इस लापरवाही से ग्रामीण आक्रोशित हैं।
कोरिया जिले के ग्राम कटगोड़ी क्षेत्र निवासी नान साय पंडो ने 24 जून को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जिसकी 25 तारीख की शाम को जानकारी मिली थी। मंगलवार की सुबह लगभग 9 बजे मृतक के शव को परिजन पोस्टमार्टम कराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत पहुंचे थे।
मामले में बीएमओ डॉ आरपी सिंह ने लिखित आदेश जारी कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत में डॉ शारदा साहू को तत्काल पोस्टमार्टम करने आदेशित किया था। लेकिन डॉक्टर ने आदेश की अनदेखी कर पीएम करने नहीं पहुंची। ऐसे में शाम 5 बजे तक मृतक का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। डॉक्टरों का यह रवैय्या देख मृतक के परिजन बेबस होकर इधर-उधर भटक रहे थे।
मामले की जानकारी स्थानीय मीडिया कर्मियों को मिलने के बाद पीएम कराने पर चर्चा की गई। इसके बाद बीएमओ डॉ सिंह ने स्वयं पोस्टमार्टम स्थल पर पहुंचकर पीएम किया। हालांकि बाद में डॉ. साहू भी पोस्टमार्टम स्थल पर पहुंचे थे, लेकिन पोस्टमार्टम किया जा चुका था।
आदेश लेने से मना, फोन भी नहीं किया रिसीव
बीएमओ डॉ सिंह ने बताया कि मृतक का पोस्टमार्टम करने के लिए सुबह ही आदेश जारी कर दिया गया था लेकिन संबंधित चिकित्सक ने आदेश लेने से मना कर दिया और कई बार फोन लगाने के बावजूद रिसीव नहीं किया। इसके बाद स्वयं आकर पोस्टमार्टम कर रिपोर्ट सौंप दी है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विकासखंड सोनहत के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कर्मचारियों की मानमानी एवं लापरवाही चरम पर है। आलम यह है कि कर्मचारी अब अपने अधिकारी का आदेश भी मानने से इंकार कर देते हंै। इसका खामियाजा पीडि़त पक्ष को भुगतना पड़ता है।
विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी
पोस्टमार्टम कार्य में इस तरीके की लापरवाही से ग्रामीण आक्रोशित हैं। सोनहत में इस तरह की घटनाएं आम हो गई है। अस्पताल में समय रहते इस तरह के की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलीं तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर चर्चा कर विरोध प्रदर्शन करने रूपरेखा बनाई जा रही है।