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Pahalgam memory: पहलगाम आतंकी हमले में सुरक्षित लौटे दंपती के घर 22 अप्रैल को बेटे ने लिया जन्म, नाम रखा ‘पहल’

Pahalgam memory: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुआ था आतंकी हमला, पति-पत्नी समेत परिवार के 11 लोग थे घटनास्थल पर मौजूद, एक साल बाद घर में गूंजी किलकारी

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Pahalgam memory

Arvind and his wife with newborn son Pahal (Photo- Patrika)

बैकुंठपुर। 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इसमें 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। हमले (Pahalgam memory) के समय घूमने गए चिरमिरी के एक युवा व्यापारी, उनकी पत्नी समेत 11 लोग भी घटनास्थल पर मौजूद थे। वे सुरक्षित बच निकले थे। घटना के सालभर बाद 22 अप्रैल को ही उनके घर किलकारी गूंजी। व्यापारी ने पहलगाम की घटना को याद कर अपने पुत्र का नाम ‘पहल’ रखा है। घटना को याद करते हुए जहां पति-पत्नी सहम जाते हैं, वहीं पुत्र रत्न की प्राप्ति के बाद उनके माथे पर सुकून है।

कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को आतंकी हमला हुआ था। इसमें 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। उससमय चिरमिरी के 11 लोग घूमने गए थे, जो बाल-बाल बच (Pahalgam memory) गए थे। इसमें एमसीबी जिले के चिरमिरी निवासी चार परिवार से 11 (4 महिला, 4 पुरुष व 3 बच्चे) लोग शामिल थे। पहलगाम में 22 अप्रैल दोपहर में पर्यटकों पर आतंकी हमला हुआ था।

जहां चिरमिरी के पर्यटकों (Pahalgam memory) के साथ हर साल ठंडी में गर्म कपड़े का व्यापार करने आने वाले व्यापारी नजाकत अली उनके साथ ही आसपास घूम फिर रहे थे। उसने हमले के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाला था।

पहलगाम में आतंकी हमले को एक साल हो चुके हैं। चिरमिरी के पर्यटकों में एक व्यापारी अरविंद अग्रवाल भी शामिल थे, जो अपनी पत्नी पूजा और बेटी समृद्धि के साथ घूमने गए थे।

Pahalgam memory: 1 साल बाद गूंजी किलकारी

चिरमिरी के बड़ी बाजार क्षेत्र निवासी अरविंद को आतंकी हमले के ठीक 1 साल बाद 22 अप्रैल को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है। व्यापारी ने आतंकी हमले की तिथि को जन्मे बेटे का नाम पहलगाम से जोडक़र पहल (Pahalgam memory) रखा है। इसकी इन दिनों चिरमिरी में चर्चा हो रही है। अरविंद का कहना है कि पहलगाम से लेकर पहल तक की यात्रा याद रहे, इसलिए हमने बेटे का नाम पहल रखा है।