नजाकत अली का कहना है कि पहलगाम (Pahalgam terror attack) की वो घटना उनके जीवन का सबसे काला दिन था, जिसे वे कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने हमले से पहले काश्मीर का माहौल भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जब कश्मीर में पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हो रही थी, सैलानियों की संख्या बढ़ रही थी, कश्मीर में सालाना करोड़ों रुपये का व्यापार हो रहा था।