
Wood smuggling, ट्रक में भरी लकड़ी और व विभाग की टीम (Photo- Patrika)
बैकुंठपुर. वन विभाग ने देवगढ़ वनपरिक्षेत्र के जंगल से अवैध लकड़ी लोड ट्रक (Wood smuggling in truck) को पकड़ा है। मामले में जब्त लकड़ी का मूल्यांकन सहित अन्य जांच चल रही है। मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई कर वन अमले ने एक ट्रक सहित १८ नग लकड़ी जब्त की है। ट्रक चालक ने लकड़ी के संबंध में कोई परमिट या दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। बताया जा रहा है कि जब्त वाहन उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में पंजीकृत है। फिलहाल वन विभाग ट्रक मालिक और अवैध लकड़ी के स्रोत की जानकारी जुटाने में लगा हुआ है। मामले में लकड़ी और ट्रक दोनों को जब्त कर लिया है।
वन विभाग के अनुसार वन अपराध के प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। साथ ही जब्त वाहन को भी राजसात करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वन अधिकारियों का कहना है कि जंगलों की अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।
वन विभाग का कहना है कि मुखबिर से उन्हें सूचना मिली कि देवगढ़ जंगल से लकड़ी की तस्करी (Wood smuggling in Devgarh forest) हो रही है। सूचना पर शनिवार की देर रात उन्होंने जंगल में घेराबंदी की, इस दौरान ट्रक में लकड़ी भरी मिली। इसके बाद उसे ट्रक समेत जब्त कर लिया गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान तस्कर फरार हो गए।
इस संबंध में कोरिया डीएफओ प्रभाकर खलखो (Koria DFO) ने कहा कि देवगढ़ रेंज के फॉरेस्टर को रात करीब 2 बजे मुखबिर से सूचना मिली। फिर चार स्टाफ को अपने साथ लेकर मौके पर पहुंचे। जहां लकड़ी लोड ट्रक बरामद हुआ। ट्रक यूपी के इलाहाबाद का है। मामले में जांच की जा रही है।
कोरिया वनमंडल के सोनहत, देवगढ़ परिक्षेत्र के जंगल से लगातार अवैध पेड़ कटाई (Trees cut by smugglers) की आए दिन शिकायतें मिलती रहती है। करीब चार महीने पहले भी झारखंड पंजीकृत एक ट्रक को जब्त किया गया था। सोनहत के बेलिया जंगल में नाकेबंदी कर ट्रक को पडक़ा गया था। हालांकि, मौके से चालक फरार हो गया था।
परमिट और टीपी (ट्रांजिट पास) की जांच में पाया था कि प्राइवेट भूमि के नाम पर सिंगल परमिट बनवाकर उसकी आड़ में लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था। जब्त लकड़ी की कीमत 7-8 लाख बताई गई थी। बताया जाता है कि अवैध लकड़ी के साथ ही लोध छाल की तस्करी वर्षों से जारी है। सोनहत से लेकर रामगढ़-छतरंग क्षेत्र तक लोध की छाल बड़े पैमाने पर निकाली जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि तस्कर गांवों में संपर्क बनाकर छाल निकलवाते हैं। स्थानीय स्तर पर कम कीमत पर खरीद कर सूरजपुर और अंबिकापुर के बाजार 80-100 रुपए प्रति किलो तक बेचते हैं। छाल का उपयोग अगरबत्ती, साबुन और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के निर्माण में होता है।
वन विशेषज्ञों का कहना है कि लोध पेड़ से अत्यधिक मात्रा में छाल निकालने पर सूखने लगते हैं। देवगढ़ परिक्षेत्र के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में गश्त की कमी का लाभ उठाकर तस्कर (Wood smugglers) सक्रिय रहते हैं। साथ ही जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर इमारती लकडिय़ों की भी कटाई करते हैं।
Published on:
14 Jun 2026 08:52 pm
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