एनसीपीएच आर-6 में वेल्डिंग की चिंगारी से लगी थी आग, डायरेक्टर जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी (डीजीएमएस) टीम के निरीक्षण के बाद लिया फैसला
चिरमिरी. एसईसीएल हल्दीबाड़ी एनसीपीएच कालरी आर-2 में सुरक्षा नियम का दरकिनार कर वेल्डिंग करने के कारण चिंगारी से आग लगने के बाद चौथे दिन मंगलवार को डायरेक्टर जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी (डीजीएमएस) टीम की निरीक्षण करने पहुंची।
इस दौरान कोयला खदान के अंदर-बाहर जांच कर सुरक्षा के लिहाज से अनिश्चितकाल तक कोयला उत्पादन बंद करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में कोल इंडिया व डीजीएम से अगला आदेश आने तक कोयला खदान में ताला जड़ दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार शनिवार शाम करीब 5-6 बजे खदान के अंदर सुरक्षा नियम को दरकिनार कर वेल्डिंग कर रहे थे। इस दौरान वेल्डिंग की चिंगारी छिटक कर कोयला भंडार के पास पहुंचा। लेकिन वेल्डिंग करने वाले तकनीकी स्टाफ ने कोई ध्यान नहीं दिया। जिससे कुछ देर बाद कोयला भण्डार से तेजी से धुआं निकलने लगा है।
मामले में कर्मचारियों ने खदान के अधिकारियों को सूचना दी। जिससे एसईसीएल प्रबंधन ने आनन-फानन में रेस्क्यू टीम को बुलाया और खदान के अंदर घुसकर रेस्क्यू टीम आग बुझाने का प्रयास किया। रेस्क्यू टीम ने खदान के अंदर आग पर काबू पाने की बात कही थी लेकिन खदान के अंदर नाइट्रोजन सहित अन्य जहरीली गैस होने की आशंका से कोयला उत्पादन बंद कर दिया गया था।
खदान में आग लगने की सूचना मिलने के बाद दोपहर पाली में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को बाहर निकाला। वहीं शनिवार रात्रि पाली और रविवार सुबह-दोपहर पाली की ड्यूटी नहीं लगाई थी। एसईसीएल हेडक्वार्टर को सूचना मिलने के बाद डीजीएमएस की एक सदस्यीय टीम पहुंची और खदान का निरीक्षण किया है।
धधकती आग नहीं बुझी, 605 कर्मचारियों के तबादले की चर्चा
जानकारी के अनुसार एनसीपीएच आर-६ खदान में आग को बुझाने वाले रेस्क्यू टीम को मुख्य महाप्रबंधक के सामल ने स्वयं नेतृत्व किया और खदान के अंदर आग बुझाने घुसे थे लेकिन खदान के अंदर धधकती आग को बुझाने में सफल नहीं मिली।
हालांकि रात को धुआं अधिक भरने के कारण मशीन से गैस की रीडिंग लेने और कार्बन मोनोऑक्साइड अधिक मात्रा में होने से आग बुझाने में परेशानी होने की चर्चा है। वहीं पैनल नंबर 42 को सील कर दिया गया है। घटना स्थल पर मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, चरचा, चिरमिरी की रेस्क्यू टीम तैनात किया गया है।
जानकारी के अनुसार एनसीपीएच हल्दीबाड़ी कालरी आर-2 माइंस में लगभग 6०३ कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें प्रतिदिन लगभग 6.50 टन कोयला उत्पादन होता है। डीजीएमएस की टीम ने खदान में आग लगने व धुआं भरने के कारण अनिश्चितकाल तक कोयला खदान को बंद करने का निर्णय लिया है। इससे करीब 603 कर्मचारियों को अन्यत्र खदान में तबादला करने की चर्चा है।
10 करोड़ की 3 मशीन, पाइप कटर मशीन व अन्य उपकरण अंदर छोड़ा
बीते 72 घण्टे में आग पर नियंत्रण नहीं होने के कारण एसईसीएल चिरमिरी ने शहर के श्रमिक संगठनों की सहमति पर हल्दीबाड़ी आर-6 भूमिगत खदान में ताला जडऩे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। माइंसस के 42 नंबर पैनल में बेल्ट स्ट्रक्चर कटिंग का कार्य चल रहा था जिसमें कार्यरत कर्मचारियों की लापरवाही के कारण आग लगी थी, जिसे बुझा पाने में एसईसीएल की रेस्क्यू टीम और एसईसीएल प्रबंधन 72 घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद काबू नहीं कर पाया है।
रामेश्वर त्रिपाठी सीनियर मैनेजर इंचार्ज रेस्क्यू चिरमिरी ने बताया की घटना तिथि से अभी तक हमारी छह सदस्यों की अलग-अलग कुल 15 रेस्क्यू टीम ने एक बार में लगभग आठ घण्टे तक पैनल 42 पर लगी आग पर काबू पाने की कोशिश की है। लेकिन मौके पर बड़ी मात्रा में धुंआ और अन्य गैस होने के कारण अंतत: बंद करना ही आखिरी विकल्प दिख रहा है।
घटना स्थल के समीप अभी एसडीएल की एक मशीन, युडीएम की एक मशीन, एलएसडी की एक मशीन को छोड़ दिया गया है और कई उपकरण पड़ा है। जिसे बाहर निकाल पाना संभव नहीं है। जिसकी लागत करोड़ो में हैं। एक मशीन की कीमत कम से कम दो करोड़ से कम की नहीं होगी। मौके पर 15 इंच की एक दीवार को खड़ा कर लीकेज के सभी विकल्प को बंद कर दिया गया है ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से जल्द ही आग ठंडी हो सकती है।
खदान को बंद करना ही विकल्प
घटना की जानकारी मिलने के बाद आज मौके पर पहुंच कर लगी आग का निरीक्षण किया गया है। मौके पर लगी आग पर नियंत्रण नहीं होने से खदान को बंद करने के आलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। बेल्ट कटिंग के कारण लापरवाही से कोयले में आग लगी है। लापरवाही तो हुई है, लेकिन पहले स्थिति नियंत्रण करना, हमारी पहली प्राथमिकता है। इसके बाद ही आगे कुछ कार्रवाई होगी। जांच चल रही है, जल्द ही इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
राजेश्वर राव, प्रभारी डीजीएमएस, एसईसीएल बिलासपुर