Hit And Run Case: देश में पिछले चार साल (2020-2024) में 3.15 लाख से ज्यादा हिट एंड रन मामले दर्ज हुए हैं। इनमें हर पांचवां मामला अकेले मध्यप्रदेश से है, जो 60,036 केस के साथ देश में पहले स्थान पर है।
Ministry of Road Transport and Highways Report: सड़क पर तेज रफ्तार से गुजरती एक गाड़ी और उसके पीछे छूट जाती है एक जिंदगी, एक परिवार और कई अधूरे सपने। हिट एंड रन सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हर साल हजारों परिवारों की ऐसी कहानी है, जिसमें अचानक सब कुछ खत्म हो जाता है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट इसी दर्द की तस्वीर सामने लाती है।
देश में पिछले चार साल (2020-2024) में 3.15 लाख से ज्यादा हिट एंड रन मामले दर्ज हुए हैं। इनमें हर पांचवां मामला अकेले मध्यप्रदेश से है, जो 60,036 केस के साथ देश में पहले स्थान पर है। महाराष्ट्र (38,263) दूसरे, उत्तर प्रदेश (38,254) तीसरे और राजस्थान 24,259 मामलों के साथ चौथे स्थान पर है।
इन आंकड़ों के पीछे कई परिवारों की दर्दभरी दास्तान है। कहीं बच्चे पिता की अंगुली तलाश रहे हैं, कहीं बूढ़े माता-पिता अपने सहारे को और कहीं एक पत्नी अपने जीवनसाथी को। चौंकाने वाली बात यह है कि 2020 में जहां ऐसे 53,623 मामले थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 68,884 तक पहुंच गया। यानी ड्राइविंग पहले से ज्यादा असुरक्षित हो गई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली और गुजरात हिट एंड रन दुर्घटनाओं की टॉप 10 की ‘ब्लैक सूची’ से बाहर है। पंजाब, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, झारखंड, केरल और उत्तराखंड जैसे राज्य भी ऐसे मामलों में दूसरे राज्यों की तुलना में काफी सुरक्षित बताए गए हैं।
| राज्य | हिट एंड रन केस |
| मध्यप्रदेश | 60036 |
| महाराष्ट्र | 38263 |
| उत्तरप्रदेश | 38254 |
| राजस्थान | 24259 |
| तमिलनाडु | 23604 |
| बिहार | 14510 |
| कर्नाटक | 12189 |
| हरियाणा | 11179 |
| तेलंगाना | 10739 |
| ओडिशा | 10562 |
केंद्र सरकार ने हिट एंड रन मोटर वाहन दुर्घटना पीड़ित प्रतिकर स्कीम अप्रैल 2022 में लागू की थी। मृत्यु की स्थिति में 2 लाख और गंभीर चोट पर 50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 205 पंजीकृत दावों में से 95 दावों का भुगतान किया गया। जिसमें 1.78 करोड़ रुपए वितरित हुए। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 9,813 पंजीकृत दावों में से 7,348 दावों का भुगतान किया, जिसकी कुल राशि 125.9 करोड़ रुपए रही। कम दावे और भुगतान को देखते हुए मंत्रालय ने इसी साल 2 मार्च को स्कीम में संशोधन किया है। ताकि इसके कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित और मजबूत किया जा सके।
| राज्य | पंजीकृत दावे | भुगतान किए गए दावे |
| बिहार | 2911 | 2872 |
| मध्यप्रदेश | 929 | 425 |
| गुजरात | 819 | 720 |
| झारखंड | 790 | 563 |
| राजस्थान | 395 | 230 |