कोटा कलक्ट्रेट परिसर में रविवार को एक ही कुत्ते ने करीब 10 लोगों को काट लिया। कलक्ट्रेट में ही नायब तहसीलदार अनुराग शर्मा को भी कुत्ते ने निशाना बनाया। 6 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है।
कोटा। कलक्ट्रेट परिसर समेत आसपास के क्षेत्र में कुत्तों ने रविवार को हमला कर करीब 20 लोगों को घायल कर दिया। घायलों में 6 को उपचार के लिए एमबीएस चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया, जबकि 14 लोगों को रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए। इसके अलावा शहर के अन्य क्षेत्रों में भी 10 लोग कुत्तों के काटने से अस्पताल पहुंचे।
लोगों ने बताया कि रविवार को कलक्ट्रेट परिसर में सफाईकर्मियों समेत 5 लोगों पर अचानक वहां घूम रहे एक कुत्ते ने हमला कर दिया और कई जगहों पर काट लिया। इसके अलावा बीच बचाव के लिए आए लोगों को भी कुत्ते ने अपना निशाना बनाया। इसके बाद वही कुत्ता माला फाटक, एमबीएस अस्पताल के आसपास भी कई लोगों को अपना निशाना बनाया। ऐसे में वहां हडकंप मच गया।
नयापुरा मस्जिद चौक क्षेत्र में भी एक आवारा कुत्ते ने 5 लोगों को काट लिया। कलक्ट्रेट में नायब तहसीलदार अनुराग शर्मा को भी एक कुत्ते ने निशाना बनाया। माला फाटक गांधी कॉलोनी निवासी प्रियांशी, नयापुरा चौराहे निवासी अशोक कुमार, नयापुरा निवासी गायत्री देवी, सोहनलाल, धापूबाई, आयुषी सीताराम समेत कई लोग कुत्तों के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे।
एमबीएस में इंजेक्शन रूम इंचार्ज पूनम आडवाणी ने बताया कि सोमवार सुबह 6 बजे से ही डॉग बाइट के मामले सामने आने लगे और दोपहर तक 30 डॉग बाइट के मामलों में रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए। इसमें करीब 20 मामले नयापुरा व आसपास के क्षेत्रों के है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से जल्द से जल्द कुत्तों को पकड़ने और स्थायी समाधान करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
शहर में कुत्तों की बढ़ती संख्या अब आमजन के लिए गंभीर परेशानी और भय का कारण बनती जा रही है। गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों, कॉलोनियों, पार्कों और स्कूलों के आसपास कुत्तों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। स्थिति यह है कि हर रोज औसतन 42 लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं, जिससे शहर में दहशत का माहौल है।
चिकित्सा विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना बड़ी संख्या में डॉग बाइट के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हैं। सुबह और शाम के समय जब लोग टहलने, बच्चों को स्कूल छोड़ने या काम पर निकलते हैं, उस दौरान कुत्तों के झुंड अचानक हमला कर देते हैं।
शहर की कई आवासीय कॉलोनियों में लोग शाम ढलते ही घर से निकलने से डरने लगे हैं। बच्चों का अकेले बाहर खेलना लगभग बंद हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुत्ते समूह में घूमते हैं और बाइक सवारों, साइकिल चालकों व पैदल चलने वालों को निशाना बनाते हैं। कई मामलों में गिरकर गंभीर चोटें भी आई हैं।
कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। नसबंदी और टीकाकरण अभियान की गति धीमी होने का आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि नगर निगम समय-समय पर अभियान चलाने की बात करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित नजर आ रहा है। नागरिकों का कहना है कि शिकायत के बावजूद कई इलाकों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
विशेषज्ञों के अनुसार शहर में खुले कचरे के ढेर और होटल-ढाबों से फेंका जाने वाला बचा हुआ भोजन कुत्तों की संख्या बढ़ने का बड़ा कारण है। कचरा प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था के कारण कुत्ते एक ही स्थान पर जमा हो जाते हैं और इलाके को अपना क्षेत्र मानकर आक्रामक हो जाते हैं।
डॉग बाइट के मामलों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। स्कूल जाते समय या खेलते वक्त बच्चे अक्सर कुत्तों का निशाना बन जाते हैं। वहीं बुजुर्गों के लिए बचाव कर पाना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में गहरे जख्म और लंबे इलाज की जरूरत पड़ती है।
'श्वानों की समस्या को मानवीय और वैज्ञानिक तरीके से ही नियंत्रित किया जा सकता है। नसबंदी कार्यक्रम को तेज करने, नियमित टीकाकरण, जागरूकता अभियान और जिम्मेदार पालतू पशु पालन जैसे कदम जरूरी हैं। साथ ही डॉग बाइट की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना बेहद आवश्यक है।'-डॉ. कर्णश गोयल, उप अधीक्षक, एमबीएस हॉस्पिटल, कोटा