
कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश और राजस्थान का नाम रोशन करने वाली बॉक्सर अरुंधति चौधरी का कोटा पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने उनका सम्मान किया। इसी दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अरुंधति चौधरी ने अच्छे कोच की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार ने खिलाड़ियों के लिए अच्छी सुविधाएं और बॉक्सिंग हॉल उपलब्ध करवाया लेकिन अब उसके मेंटेनेंस और अच्छे कोच की जरूरत है। वहीं साथ ही उनके पिता ने भी अपनी बेटी के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे बिना अच्छे कोच के भी अरुंधति ने यह मुकाम हासिल किया।
गोल्ड मेडलिस्ट अरुंधति चौधरी ने बातचीत के दौरान अपने भविष्य के लक्ष्य भी साझा किए। उन्होंने बताया कि अभी उनका पूरा ध्यान तैयारी पर ही है। अगले साल होने वाले चैंपियनशिप से उन्हें ओलंपिक्स के लिए टिकट लेना है। साथ ही उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में मिली सफलता पर भी खुशी जताई। उन्होंने बताया कि उनको उनके गांव वालों से भी बहुत सपोर्ट और प्यार मिल रहा है जो उन्होंने कभी सोचा नहीं था।
अरुंधति के पिता ने बताया कि बॉक्सिंग में सबसे जरूरी चीज एक अच्छी रिंग और अनुभवी कोच होते हैं, लेकिन उसके पास दोनों ही नहीं थे। उन्होंने कहा कि जिस कोच ने अरुणधति को ट्रेनिंग दी, उन्होंने भी यूट्यूब से सीखकर उसे तैयार किया। उन्होंने बताया कि अरुंधति के मन में ओलंपिक खेलने का जुनून था, जिसने उसे यहां तक पहुंचाया। इस सफर में कई लोगों ने उन्हें बुरा-भला भी कहा, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी बेटी का साथ दिया और उसके लिए डटे रहे।
आपको बता दें कि फाइनल मुकाबले से एक दिन पहले अरुंधति की तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें तेज बुखार था और काफी कमजोरी भी महसूस हो रही थी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, पूरे जज्बे के साथ रिंग में उतरीं और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अरुंधति चौधरी गुरुवार को अपने गृहनगर कोटा पहुंचीं। जयपुर एयरपोर्ट से लेकर कोटा तक पूरे रास्ते उनका स्वागत किया गया। कई सामाजिक संगठनों, खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका सम्मान किया। जयपुर एयरपोर्ट पर उनका पूरा परिवार स्वागत के लिए मौजूद था। जब दो दिन के सफर के बाद देर रात अरुंधति अपने घर पहुंचीं तो उनकी मां ने आरती उतारकर उनका स्वागत किया। मां से गले मिलते ही वह भावुक हो गईं। इसके बाद उन्होंने अपना गोल्ड मेडल मां के गले में पहनाकर इस जीत को पूरे परिवार को समर्पित कर दिया।