
कोटा. चम्बल घडिय़ाल सेंचुरी के रंगपुर एरिया में इन दिनों बेखौफ रेत का अवैध खनन हो रहा है। रेत माफिया दिन रात चम्बल का सीना छलनी कर रेत निकालकर उसे इकठ्ठा कर ऊंचे पहाड़ बना रहे हैं, ताकी इसे बरसात में मोटी रकम में बेचा जा सके। यह जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं करते।
पत्रिका में 'अवैध रेत खनन से छलनी चर्मण्यवती का आंचल' शीर्षक से समाचार प्रकाशित होने के बाद विभाग में हड़कम्प मचा हुआ है। चंबल घडिय़ाल अभयारण्य के उपवन संरक्षक रामबाबू भारद्वाज का कहना है कि कार्रवाई करते हैं तो 'नेताजी' हड़का देते हैं। राजनीतिक दबाव के चलते अधिकारी कार्रवाई से बचते हैं।
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इस सम्बंध में लाडपुरा विधायक भवानी सिंह राजावत से बात की तो उन्होंने एक बार फिर विवादित बयान देते हुए कहा कि रंगपुर में घडिय़ाल मरते हो तो मर जाए, आदमी नहीं मरना चाहिए। यहां रेत निकालना बंद नहीं होगा, कोई यहां रेत निकालने से कोई रोक नहीं सकता। राजावत ने कहा कि यहां लोग पीढिय़ों से रेत निकाल रहे हैं, यहां रेत निकालना अवैध नहीं है। पानी में ये लोग जान जोखिम में डालकर रेत निकालकर अपना पेट पाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका विरोध करना मानवता की हत्या करना है।
पाटन से 9 ट्रैक्टर ट्रॉली जप्त, कोटा से एक भी नहीं
चम्बल घडिय़ाल सेंचुरी क्षेत्र में केशवराय पाटन की तरफ तो अधिकारियों ने 9 ट्रैक्टर ट्रॉलियों को जप्त किया है, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से रंगपुर में कार्रवाई नहीं हुई। यहां रेलवे कॉलोनी थाने की जीप नियमित गश्त करती है, बीट कांस्टेबल भी तैनात है, लेकिन उसके बाद भी अवैध रेत खनन पर कार्रवाई नहीं हुई।
एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
वन मंडल कोटा के अधिकारी कहते हैं कि ये क्षेत्र चम्बल घडिय़ाल सेंचुरी में आता है, उन्हें ही कार्रवाई करनी चाहिए। जबकि सेंचुरी के अधिकारी कोटा वन मंडल को कार्रवाई करने की बात कहते हैं।
शीघ्र करेंगे कार्रवाई
वैसे तो कोटा मंडल वाले कार्रवाई करेंगे, लेकिन अवैध खनन का मामला जानकारी में आया है तो शीघ्र ही कार्रवाई करेंगे और मामले में कोटा मंडल को सौंप देंगे।
-श्रीनिवास सारस्वत, रेंजर