
कोटा . अपने बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहने वाले भाजपा के विधायक भवानी सिंह राजावत ने इस बार वसुंधरा सरकार के साथ-साथ पूरी पार्टी को ही मुसीबत में धकेल दिया है। लाड़पुरा विधायक ने इस बार विधायक निधि से बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकार के फैसले से भड़के राजावत ने कहा कि यदि विधायकों को विकास निधि से मूर्तियां ही लगवानी हैं तो सिर्फ अंबेडकर की प्रतिमा को ही क्यों चुना गया। महाराणा प्रताप में क्या बुराई थी?
विधायकों को मिले फैसले का अधिकार
राजावत ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ बयान जारी करते हुए कहा कि राजस्थान की धरती संतों और सूरमाओं से भरी पड़ी है। राजस्थान में हर साल आने वाले 2 करोड़ पर्यटक सिर्फ हल्दी घाटी देखकर रोमांचित हो उठते हैं। जहां महाराणा प्रताप ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अकबर से लोहा लिया, भीलों, गाडिय़ा लुहारों, गरासियों को साथ लेकर अदम्य साहस के साथ पराक्रम दिखाया और मेवाड़ की रक्षा की। ऐसे में विधायकों को यह अधिकार दिया जाना चाहिए कि वो देश को आजादी दिलवाने वाले क्रांतिकारियों की प्रतिमा भी विधायक कोष से लगा सकें।
फैसले पर हो फिर से विचार
विधायक राजावत ने वसुंधरा सरकार को घेरते हुए कहा कि भीमराव अम्बेडकर संविधान निर्माता थे इसलिए वह सभी जातियों में पूज्यनीय हैं और इस आधार पर उनकी प्रतिमा सभी जगह लगाई जा रही है। ठीक उसी तरह मातृभूमि की रक्षा के लिए राजसी जीवन के साथ-साथ प्राणों की आहूति देने वाले महाराणा प्रताप भी भारत माता सपूत के रूप में प्रत्येक जाति के लिए पूज्य हैं, तो फिर प्रताप की प्रतिमा लगाने का निर्देश सरकार ने क्यों जारी नहीं किया? ऐसे में सरकार को अपना फैसला बदलकर विधायक कोष से महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगाने का भी निर्देश जारी करना चाहिए।