कोटा

रबी सीजन में किसानों को कितना मिलेगा चंबल का पानी? राजस्थान-मध्यप्रदेश के बीच जल्द होगा फैसला

मानसून की विदाई का वक्त आ गया है। इस बार राजस्थान और मध्यप्रदेश में मानसून की बेरुखी के कारण बांध पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। ऐसे में रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की कमी रहने की आशंका है।
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Sep 24, 2026
chambal water sharing
चंबल की दाईं मुख्य नहर। फोटो: पत्रिका

कोटा। मानसून की विदाई का वक्त आ गया है। इस बार राजस्थान और मध्यप्रदेश में मानसून की बेरुखी के कारण बांध पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। ऐसे में रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की कमी रहने की आशंका है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के खेतों को सरसब्ज करने वाली चंबल सिंचाई परियोजना पर भी इसका असर पड़ने वाला है। चंबल के बांधों में भी अपेक्षाकृत कम पानी है। चंबल जल बंटवारे को लेकर मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियंत्रण मंडल की तकनीकी समिति की बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित है।

बैठक के मद्देनजर दोनों राज्यों की संयुक्त समिति चंबल के चारों बांधों में उपलब्ध पानी का आकलन करेगी। इसी के आधार पर दोनों राज्यों के बीच पानी का बंटवारा तय होगा। जल बंटवारे में पेयजल और उद्योगों के लिए पानी आरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद वाष्पीकरण ह्रास का आकलन कर सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी की मात्रा तय की जाएगी।

सूत्रों ने बताया कि तकनीकी समिति की बैठक का शेड्यूल 25 सितम्बर तक तय किया गया था, लेकिन हाल में दोनों राज्यों में हुई बारिश से बांधों में पानी की आवक हुई है। इसलिए अब पानी का आकलन पांच अक्टूबर तक किया जाएगा। इसके बाद दोनों राज्यों की संयुक्त बैठक होगी। इस बार बैठक की अध्यक्षता राजस्थान के मुख्य अभियंता करेंगे।

चंबल के बांध कितने भरे हैं

बांधजलभराव (%)
गांधी सागर बांध75.65
राणाप्रताप सागर बांध73.29
जवाहर सागर बांध75.64
कोटा बैराज98.08

गांधी सागर बांध का जलस्तर 1302.14 फीट पहुंचा

चंबल नदी के सबसे बड़े बांध गांधी सागर का जलस्तर हाल में हुई बारिश से करीब एक फीट बढ़ गया है। गांधी सागर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में पिछले सप्ताह अच्छी बारिश हुई। इससे बांध का जलस्तर भराव क्षमता 1312 फीट के मुकाबले 1302.14 फीट तक पहुंच गया है। यह कुल जलभराव क्षमता का 75.65 प्रतिशत है।

फैक्ट फाइल

  • 1960 में चम्बल का नहरी तंत्र विकसित
  • 63 दाईं और बाईं मुख्य नहर की शाखाओं, उपशाखाओं व वितरिकाओं की संख्या
  • 16 किमी आबादी क्षेत्र में दाईं मुख्य नहर व इसकी छोटी नहर
  • 5 किमी आबादी क्षेत्र में बाईं मुख्य नहर, माइनरें तथा वितरिकाएं
  • 1.27 लाख हैक्टेयर दाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र
  • 1.2 लाख हैक्टेयर बाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र
  • 6656 क्यूसेक दाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता
  • 1500 क्यूसेक पानी बाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता
  • 3 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित
  • 124 किमी दाईं मुख्य नहर राजस्थान में
  • 248 किमी मध्यप्रदेश की सीमाओं में जल प्रवाहित करती है
  • 24.6 प्रतिशत हिस्सेदारी एमपी की होती है दाईं मुख्य नहर के समस्त कार्यों में
  • 24.6 प्रतिशत राशि राजस्थान वहन करता है दाईं मुख्य नहर के कार्यों में

इनका कहना है

अक्टूबर के पहले सप्ताह में जल बंटवारे को लेकर बैठक प्रस्तावित है। इसमें पानी के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी। फिलहाल बैठक का एजेंड़ा नहीं आया है। बैठक में मुख्यतया जल प्रवाह के संबंध में ही चर्चा होगी।
-संजय सिंह, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा

Updated on:
24 Sept 2026 08:52 am
Published on:
24 Sept 2026 08:52 am