कोटा

कोटा के 112 वर्ष पुराने चिडिय़ाघर के प्रवेश द्वार की बदलेंगे दिशा… जानिए क्यों….?

वन विभाग ने नयापुरा स्थित चिडिय़ाघर का रूप संवारने की कवायद शुरू कर दी है। इसका जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

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Jan 11, 2018
kota zoo

कोटा . वन विभाग ने नयापुरा स्थित चिडिय़ाघर का रूप संवारने की कवायद शुरू कर दी है। हालांकि अभेड़ा क्षेत्र में बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन जब तक यह पार्क बनकर तैयार नहीं होता जब तक चिडिय़ाघर में वन्यजीवों को बेहतर माहौल मिले व दर्शकों को आकर्षित करने के लिए इसका जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसमें चिडिय़ाघर की सीमा का विस्तार तो होगा ही व्यवस्थाओं में भी बदलाव होगा। विभाग ने इसके लिए कार्य शुरू भी कर दिया है।

चिडिय़ाघर परिसर में शाकाहारी व मांसाहारी दोनों तरह के वन्यजीवों के इलाज के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। इसमें आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था रहेगी, वहीं स्क्वीज की व्यवस्था की जाएगी, ताकि बीमार या घायल वन्यजीव को ड्रेसिंग करने या इन्जेक्शन के लिए बेहोश करने की आवश्यकता नहीं पड़े। अभी एक बाडे में वन्यजीव की ड्रेसिंग करनी पड़ती है।

चारदीवारी का विस्तार

चिडिय़ाघर खुला-खुला व बड़ा नजर आए, साथ ही पर्यटक आराम से भ्रमण कर सकें, इसके लिए चिडिय़ाघर के पास स्थित गली को भी इसमें शामिल किया है। कार्यालय प्रवेश की ओर करीब 8 से 10 फीट विस्तार किया जाएगा। पीछे की तरफ भी चिडिय़ाघर का करीब दो फीट विस्तार किया है।

मुख्यद्वार आगे की ओर

चिडिय़ाघर का प्रवेश द्वारा अब स्टेडियम रोड की तरफ होगा। यह वन्यजीव विभाग कार्यालय के प्रवेशद्वार के पास ही बनेगा। यहीं पर टिकट विंडो भी होगी। 13 व 15 फीट चौड़ाई के दो प्रवेशद्वार बनेंगे। एक कार्यालय व दूसरा चिडिय़ाघर में प्रवेश के लिए होगा। कछुओं के बाड़े को भी अलग-अलग प्रजातियों के अनुसार दो भागों में विभक्त किया है। कुछ वन्यजीवों के पिंजरों में बदलाव किया है।

100 साल से ज्यादा पुराना

चिडिय़ाघर 112 वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना 1905 में की गई थी। वर्तमान में इसमें सवा सौ से अधिक वन्यजीव हैं। इनमें बाघिन, पैंथर, जरख, अजगर, काले हरिण, नीलगाय, चीतल समेत अन्य वन्यजीव हैं।

चिडिय़ाघर परिसर में कुछ भाग को मिलाया गया है। वन्यजीवों के लिए रेस्क्यू सेंटर बनवाने की योजना है। जर्जर दीवार को नए सिरे तैयार कर चिडिय़ाघर के प्रवेशद्वार को मैनरोड की तरफ रखने की योजना है। इससे दर्शक आसानी से चिडिय़ाघर में प्रवेश कर सकंगे।

सुनील चिद्री, उपवन संरक्षक, वन्यजीव विभाग

Published on:
11 Jan 2018 06:56 pm
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