
अभिषेक गुप्ता कोटा.कोरोना वायरस संक्रमण के इस दौर में कैसे-कैसे दिन देखने को मिल रहे हैं। अस्पताल में जन्म के दस दिन बाद भी एक मां अपने लाल को कलेजे से लगाना तो दूर उसे देख तक नहीं पाई है। नवजात के लिए मां का दूध जरूरी होता है, लेकिन मां का दूध भी अब तक नसीब नहीं हुआ है। दास्तां है कोरोना से लाडपुरा निवासी पीडि़त महिला की। महिला ने 26 अप्रेल को पुत्र को जन्म दिया था, लेकिन कोरोना के कारण जन्म के बाद ही संक्रमण फैलने के डर से नवजात को मां से अलग कर दिया। मां अभी भी अस्पताल में कोरोना से जूझ रही है, वहीं नवजात को चिकित्सकों ने अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया।
ऑपरेशन से हुआ : लाडपुरा निवासी महिला को 22 अप्रेल को कोरोन संक्रमित होने के कारण नए अस्पताल कोविडेड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह गर्भवती थी। 26 अप्रेल को उसका ऑपरेशन हुआ। इसमें बच्चे का जन्म हुआ। मां के कोरोना संक्रमण के कारण दोनों को बचाना चुनौतिपूर्ण कार्य था। चिकित्सकों ने मां-बेटे दोनों को बचा लिया।
स्टाफ ने संभाला: मां-बेटे को अलग-अलग वार्डों में रखा गया। बच्चे को चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने संभाला। बच्चे के रोने की आवाज पर नर्सिंग स्टाफ ने उसे संभाला और खिलाया।
डिब्बा बंद दूध पिला रहे : मां कोरोना आइसोलेशन वार्ड में भर्ती है। चिकित्सकों के अनुसार, उसकी पहली रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है। अब दूसरी रिपोर्ट का इंतजार है। महिला के परिजनों ने बताया कि बेटे की मां कोरोना से संक्रमित होने के कारण वे दूध नहीं पिला सकती। बहन व उसकी दादी घर पर बच्चे को संभाल रहे हैं। वे उसे डिब्बा बंद दूध पिला रहे हैं।