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अब लॉकडाउन के दौरान भूल के भी न करना ये काम, हो सकती है जेल

अपंजीकृत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समाचार प्रसारण पर रोक
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अब लॉकडाउन के दौरान भूल के भी न करना ये काम, हो सकती है जेल

अब लॉकडाउन के दौरान भूल के भी न करना ये काम, हो सकती है जेल


अवहेलना पर एक वर्ष के कारावास की सजा व जुर्माने का प्रावधान

कोटा. विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कोविड-19 को महामारी घोषित किए जाने की स्थिति को देखते हुए जिले में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ ॉर्म, सोशल मीडिया चैनल, अपंजीकृत सोशल मीडिया पेज पर संचालन, प्रसारण, न्यूज चैनल के रूप में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से संचालन को आगामी आदेशों तक प्रतिबंधित किया गया है।

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जिला कलक्टर ने बताया कि कोटा जिले में कतिपय व्यक्तियों ने बिना सक्षम प्राधिकारी, जन सम्पर्क निदेशालय या आयुक्त सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के समक्ष पंजीबद्ध कराए बिना गैर सत्यापित व भ्रामक तथ्यों के आधार पर समाचारों का सम्प्रेषण, सोशल मीडिया के प्लेटफ ॉर्म के माध्यम से किया जा रहा है। इससे समाज में कोरोना महामारी जैसे संकट के समय उत्तेजना फैलना सम्भावित है। उन्होंने बताया कि इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो इसके असाधारण रूप से दूरगामी विपरीत परिणाम हो सकते हैं और आमजन के मानसिक स्वास्थ्य पर तात्कालिक विपरीत प्रभाव पडऩा सम्भावित है। इसके अलावा सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ ॉर्म का न्यूज चैनल के रूप में प्रयोग करना पत्रकारिता की श्रेणी के तहत आता है। जिला कलक्टर ने बताया कि कोटा जिले में किसी भी सोशल मीडिया पर संचालित न्यूज चैनल द्वारा अनुमति नहीं ली गई है, न ही अपने आपको निदेशालय सूचना एवं जन सम्पर्क निदेशालय राजस्थान सरकार जयपुर व सूचना प्रसारण मंत्रालय में पंजीबद्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण (Corona ) की इस असाधारण स्थिति में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म को न्यूज चैनल के रूप में संचालन से किसी प्रकार की इरादतन या गैर इरादतन फेक या गलत रिपोर्टिंग से समाज के बड़े हिस्से में घबराहट की स्थिति पैदा होने की गम्भीर व अपरिहार्य संभावना है।

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उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर संचालित समस्त न्यूज चैनल की गतिविधियों को आगामी आदेशों तक प्रतिबन्धित किया गया है। जिला कलक्टर ने बताया कि आदेशों की अवहेलना करने पर भारतीय दण्ड संहिता और आपदा प्रबन्धन अधिनियम 2005 तथा ऐपीडेमिक डिजीज एक्ट 1957 की धारा 1 व 2 के तहत दण्डनीय होगा। जो कोई भी व्यक्ति आपदा या इसकी गम्भीरता के सम्बन्ध में झूठी चेतावनी को प्रसारित करता है। उसके परिणामस्वरूप समाज में लोगों के बीच घबराहट फैलती है, ऐसी झूठी चेतावनी फैलाने वाले व्यक्ति को 1 वर्ष तक कारावास की सजा और जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा।