यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड के लिए भटकने को मजबूर दिव्यांग। बेपरवाह जिम्मेदारों ने दिव्यांगों की मुसीबत को और बढ़ा दिया
अपनी नई पहचान के लिए दिव्यांग इन दिनों सरकारी महकमों में धक्के खाने को मजबूर हैं। नई योजना के तहत यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड के लिए दिव्यांग ऑनलाइन व्यवस्था के साथ चिकित्सा विभाग की अव्यवस्थाओं का दंश झेल रहे हैं। दिव्यांगों को देशभर में सुविधाएं और रियायत का लाभ दिलाने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था लागू की है, लेकिन बेपरवाह जिम्मेदारों ने दिव्यांगों की मुसीबत को और बढ़ा दिया है। दिव्यांग नए परिचय पत्र के लिए चिकित्सा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
शुरू से ही गड़बड़ाई व्यवस्था
नई योजना के तहत यूडी आईडी के लिए पहले सम्बंधित ई-मित्र केन्द्रों पर ऑनलाइन पंजीयन करवाना था, लेकिन अप्रशिक्षितों के हाथों में यह बागडोर देने के चलते बड़ी संख्या में दिव्यांगों के पंजीयन में ही गलत जानकारी दर्ज हो गई, जिससे कई आवेदन पर आपत्ति लग गई। एक त्रुटि की वजह से अब दिव्यांग धक्के खाने को मजबूर हैं।
यहां सबसे बड़ी परेशानी
जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा सत्यापित कर यूडीआईडी कार्ड जारी किया जाएगा। आईडी जारी होने के बाद शासन की समस्त योजनाओं का लाभ दिव्यांगों को सुगमता से प्राप्त हो सकेगा, लेकिन सबसे अहम रोल निभाने वाले चिकित्सा महकमे के सुस्त रवैये के चलते व्यवस्था ही लडख़ड़ा गई। योजना के तहत विभाग जागरूक होकर काम नहीं कर रहा। जबकि निर्देश हैं कि दोपहर 12 से 2 बजे तक हर सीएससी पीएसी लेवल पर प्रमाण पत्र बनेंगे, जहां मेडिकल ऑफिसर को ड्यूटी देनी है, लेकिन हकीकत यह है कि ये अधिकारी अपने तय समय पर ही नही मिलते। कुल दो हजार आवेदन विभाग में लम्बित हैं।
यह होगा फायदा
इस नई व्यवस्था से प्रदेश के बाहर भी दिव्यांगों को परिवहन की सुविधाएं भी आसानी से मिल सकेगी। प्रदेश के बाहर नौकरी के लिए आवेदन करने में भी आसानी होगी। यूडीआईडी से किसी भी दिव्यांग की पड़ताल भी आसानी से की जा सकेगी। एक बार यूडीआईडी बनने पर दिव्यांगों के प्रमाण पत्र में किसी भी तरह का बदलाव नहीं हो सकेगा।
ये कहा जिम्मेदारों ने
समाज कल्याण विभाग की उपनिदेशक सविता कृष्णैया ने कहा कि मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में नए प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आने वाले सभी दिव्यांगों को यूनिक आईडी जारी होगी। विभाग से दो हजार आवेदन चिकित्सा विभाग को भेजे जा चुके हैं। सीएमएचओ डॉ. सुरेश जैन इस मामले में शुक्रवार को जिला कलक्टर के साथ बैठक होगी। मेरे पास जितने आवेदन आते हैं प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। ऑपरेटर की वजह से भी दिक्कत आ रही है। हिंडोली डिस्पेंसरी से भी शिकायत मिली है। विकलांग विकास संगठन राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष हेमराज मीना दिव्यांगों को दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत शिविर में कोई लाभ नहीं मिल रहा है। अधिकांश दिव्यांग यूनिक आईडी के लिए धक्के खा रहे हैं।
अब तक की स्थिति
15 हजार 296 रजिस्ट्रेशन। ब्लॉक लेवल पर पीएमओ के पास 902 व सीएमओ के पास 273 आवेदन लम्बित चिकित्सा विभाग के पास करीब 13162 आवेदन लम्बित। प्रमाण पत्र बने महज 50। टारगेट 30 नवम्बर तक करना है पूरा। दौलाडा निवासी रामलाल को जन्मजात पोलियो है, लेकिन आवेदन पंजीयन में दुर्घटना बता रखा है। अब चिकित्सा विभाग में धक्के खा रहा है। देवपुरा निवासी दिव्यांग भोली पिछले पांच दिनों से चक्कर काट रही है। 100 प्रतिशत दिव्यांग इस महिला का प्रमाण पत्र तो आ गया, लेकिन ओके नहीं हो रहा। बरुंधन निवासी चन्द्रप्रकाश शर्मा नई व्यवस्था के तहत ई-मित्र केन्द्र पर आवेदन पंजीयन करने गए जहां पर उसका फोटो ही बदल दिया गया। अब भटकने को मजबूर है।