कोटा. नारायणा मल्टी स्पेशलिटी जयपुर एवं न्यूरो केयर एण्ड रिसर्च फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार को उम्मेद भवन में सीएमई का आयोजन किया गया।
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नारायणा मल्टी स्पेशलिटी जयपुर एवं न्यूरो केयर एण्ड रिसर्च फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार को उम्मेद भवन में सीएमई का आयोजन किया गया। इसमें न्यूरो इंटरवेनशन तकनीकी एवं राजस्थान में न्यूरो सर्जरी एवं न्यूरोलॉजी के डवपलमेंट के बारे में चर्चा की गई। सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. कृष्ण हरि शर्मा ने बताया कि माइक्रो स्कोप के साथ-साथ एंडोस्कोप एवं न्यूरो नेविकेशन के इस्तेमाल से ब्रेन के अंदरूनी हिस्सों में स्थित किसी भी ट्यूमर का जटिल ऑपरेशन अब संभव है। एंडोस्कोप का इस्तेमाल नाक के रास्ते ब्रेन ट्यूमर निकालने, सिर में पानी भरने वाले मरीजों में बिना शंट डाले पानी का रास्ता बनाने एवं ट्यूमर की बायोस्पी लेने का काम आसानी से हो जाता है।
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ब्रेन हेमरेज के मरीजों में भी एंडोस्कोप के इस्तेमाल से इलाज में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। इसमें मरीज को कम से कम नुकसान पहुंचाए, खून का थक्का आसानी से निकाल लिया जाता है। ब्रेन के अलावा एंडोस्कोप का उपयोग स्लिप डिस्क आदि के ऑपरेशन में भी किया जाता है। मरीज को 24 घंटे में ही छुट्टी कर दी जाती है। न्यूरो नेविकेशन के इस्तेमाल से ही ब्रेन व रीड की हड्डी के ऑपरेशन सटीकता से किया जाना संभव हुआ है।
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नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरवेशनल न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि गर्दन में खून की नसों में सिकुडऩ, ब्रेन की खून की नसों का फटने या ब्लॉक होने से ब्रेन अटैक होना, ब्रेन में खून की नसों का गुब्बारा होना आदि सफल ऑपरेशन संभव है। इसके लिए पैर की धमनी में तार डालकर उस तार को दिमाग तक पहुंचाकर विभिन्न प्रकार माइक्रो कैपेटर व कोइल का इस्तेमाल कर इलाज किया जाता है। इसमें चीर फाड़ की आवश्यकता नहीं होती। न्यूरो इंटरवेशन से जानलेवा बीमारियों का इलाज संभव हुआ है। सीएमई में डॉ. विजय सरदाना, डॉ. भारत भूषण ने भी भाग लिया।