यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोटा में पहली बार डीआरएम भरी सर्दी में पटरियों पर पहुंच गई। सिग्नल फेल होने पर रेलवे अफसरों की नींद उड़ गई।
कोटा . कोहरे और सर्दी के चलते पटरियों में फ्रेक्चर के बढ़ते खतरे को देखते हुए रेल प्रशासन ने संरक्षा से जुड़े कर्मियों को ज्यादा सर्तक रहने के निर्देश दिए हैं। इसी बीच डीआरएम यूसी जोशी खुद ही मंगलवार देर रात ट्रेक की सुरक्षा जांचने पहुंचे। उन्होंने दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग के समपार फाटक संख्या 111 गुडला से समपार फाटक 116 केशवरायपाटन के बीच ट्रेक की पेट्रोलिंग भी की। इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी डॉ. आरएन मीना भी मौजूद रहे। उन्होंने संरक्षा कार्य योजना की विस्तृत जानकारी दी। संभवत: पहली बार मंडल के किसी डीआरएम ने इस तरह ट्रेक की पेट्रोलिंग की है।
देरी से पहुंचे ईएसएम
इस दौरान उन्होंने पेट्रोलिंग करने वाले कार्मिकों से भी संवाद किया और समस्याएं भी पूछी। डीआरएम ने संरक्षा उपकरण, सुरक्षात्मक कपड़े, जूते, फ्लोरोसेंट जैकेट आदि की जांच की। एक ट्रेकमैन के पास सर्दी से बचने के लिए जैकेट नहीं मिली। वहीं सिग्नल फेल होने पर ईएसएम को सूचना दी लेकिन वो काफी देरी से मौके पर पहुंचे। डीआरएम जोशी ने केशवरायपाटन और गुडला स्टेशन का भी जायजा लिया।
बोर्ड अध्यक्ष ने भी की थी
इससे पहले रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने भी 6 जनवरी को की रात दिल्ली-रेवाड़ी खण्ड पर पेट्रोलमैन के साथ नाइट पेट्रोलिंग की थी। उत्तर भारत में पडऩे वाले इस बहुत ही ठंडे एवं सर्द मौसम में लोहानी ने दो किलोमीटर ़चलकर अधिकारियों का ध्यान सेफ्टी की ओर खींचा। इसके बाद पश्चिम मध्य रेलवे में कोटा मंडल में डीआरएम ने सबसे पहले यह पहल की। गौरतलब है कि कोहरे और सर्दी के चलते पटरियों में फ्रेक्चर के बढ़ते खतरे को देखते हुए डीआरएम ने पटरियों का निरीक्षण किया। साथ ही सभी अधिकारियों को यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता बरतने को कहा। वहीं, सिग्नल फेल होने पर नाराजगी जताई।