Inspiring Youth Of Rajasthan: कोटा के इंजीनियर समग्र सिंह चौहान ने ऑटोमोबाइल सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय स्तर का नवाचार किया है। उन्होंने कारों में बच्चों की मौजूदगी का पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला विशेष उपकरण विकसित किया है।
Engineer Samagra Singh Chauhan Innovation: कोटा के इंजीनियर समग्र सिंह चौहान ने ऑटोमोबाइल सुरक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला नवाचार किया है। उन्होंने कारों में नॉन-कॉन्टैक्ट वाइटल सेंसिंग तकनीक और वाहन के अंदर बच्चे की मौजूदगी का पता लगाने वाला विशेष सुरक्षा उपकरण विकसित किया है। जिसकी ग्लोबल पेटेंट फाइलिंग की गई है। समग्र सिंह वर्तमान में एक बहुराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल इंटेलिजेंस व इनोवेशन आधारित कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए किए गए इस आविष्कार के लिए कंपनी प्रबंधन ने उन्हें सम्मानित भी किया है।
अक्सर देखने में आता है कि छोटे बच्चे खेल-खेल में कार को अंदर से लॉक कर लेते हैं या कई बार अभिभावक अनजाने में कार लॉक कर किसी कार्य से बाहर चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में कार के पूरी तरह बंद होने से अंदर गैस बन जाती है, जिससे बच्चे के बेहोश होने या दम घुटने से मौत तक की घटनाएं सामने आई हैं। कई मामलों में समय रहते पता न चल पाने के कारण गंभीर हादसे हो जाते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को रोकने के उद्देश्य से इस अत्याधुनिक सुरक्षा डिवाइस का विकास किया गया है।
यह उपकरण वाहन के पैसेंजर कंपार्टमेंट में मौजूद बच्चों और पालतू जानवरों का पता लगाने के लिए अल्ट्रा-वाइडबैंड ट्रांससीवर तकनीक का उपयोग करता है। यह तकनीक बिना किसी शारीरिक संपर्क के व्यक्ति की मौजूदगी और वाइटल साइन को पहचानने में सक्षम है। यह सिस्टम वाहन के मौजूदा वॉर्निंग और नोटिफिकेशन सिस्टम की सीमाओं को दूर करता है और विशेष रूप से सोते हुए बच्चों या मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे ड्राइवरों के लिए अलग-अलग प्रकार के अलर्ट और रिस्पॉन्स प्रदान करता है।
पेटेंट डॉक्यूमेंट में ऐसे उन्नत सिस्टम और तरीकों का उल्लेख किया गया है, जो गाड़ियों में कम्युनिकेशन को प्राथमिकता के आधार पर मैनेज करते हैं। इसमें यह निर्धारित किया जाता है कि वाहन मैनुअल मोड में चल रहा है या ऑटोमैटिक ड्राइवर असिस्टेंस मोड में।
इसके तहत इनकमिंग कॉल, नोटिफिकेशन और अन्य कम्युनिकेशन इवेंट को उनकी प्राथमिकता के अनुसार क्लासिफाई किया जाता है और उसी आधार पर ड्राइवर या सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए कॉन्फिगर किया जाता है। कम्युनिकेशन पूरा होने के बाद ड्राइवर की स्थिति का विश्लेषण कर वाहन को पुनः सुरक्षित ड्राइविंग मोड में लाया जाता है।