Parole Violation Case: कोटा सिटी पुलिस की विशेष शाखा की टीम ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए 2018 में नियमित पैरोल पर रिहा होकर फरार हुआ 25 हजार रुपए का इनामी अपराधी लखन उर्फ लक्ष्मीनारायण को पुलिस ने उदयपुर से गिरफ्तार किया है।
Parole Violation Case: कोटा सिटी पुलिस की विशेष शाखा की टीम ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए 2018 में नियमित पैरोल पर रिहा होकर फरार हुआ 25 हजार रुपए का इनामी अपराधी लखन उर्फ लक्ष्मीनारायण को पुलिस ने उदयपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी गैंगरेप के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और जयपुर के सांगानेर थाना क्षेत्र में दर्ज प्रकरण में दोषी ठहराया गया था। पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद भी जेल में उपस्थित नहीं होने पर वह पिछले करीब आठ वर्षों से फरार चल रहा था।
एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि लंबे समय से वांछित और इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत गठित टीम ने आरोपी को ट्रेस कर उदयपुर से डिटेन किया। आरोपी पहचान छिपाकर एक गेस्ट हाउस में काम कर रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था।
आरोपी तक पहुंचने में विशेष शाखा के कांस्टेबल तंवर सिंह की अहम भूमिका रही। उनके द्वारा संकलित आसूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर ही आरोपी की वर्तमान लोकेशन का पता चल सका। टीम में एएसआइ विशाल अवस्थी, कांस्टेबल महेन्द्र सिंह, बुद्धिप्रकाश,दुलीचंद सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
पुलिस ने बताया कि आरोपी को 25 अगस्त 2018 को 20 दिन की नियमित पैरोल पर रिहा किया गया था। उसे 13 सितंबर 2018 को वापस जेल में उपस्थित होना था, लेकिन वह निर्धारित तिथि पर नहीं लौटा। इस पर थाना नयापुरा में प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की गई। गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि पैरोल से फरार होते ही आरोपी ने अपनी गतिविधियां छिपा लीं। उसने पैतृक गांव सेमरोल, जिला मंदसौर (मध्यप्रदेश) में आना-जाना बंद कर दिया और रिश्तेदारों से भी दूरी बना ली। वह लगातार स्थान बदलकर रह रहा था ताकि पुलिस की नजर से बच सके। विशेष टीम ने मंदसौर, सुवासरा सहित कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी और स्थानीय स्तर पर मुखबिर तंत्र सक्रिय किया। तकनीकी अनुसंधान के जरिए आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम उदयपुर पहुंची। आरोपी काफी शातिर प्रवृत्ति का होने के कारण टीम ने सीधे कार्रवाई के बजाय पहले गुप्त रैकी की। टीम के सदस्यों ने गेस्ट हाउस में किरायेदार बनकर कमरा लिया और गैस सिलेंडर डिलीवरी कर्मी के रूप में भी जानकारी जुटाई। आरोपी गेस्ट हाउस से बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतता था और अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर रखता था। लगातार निगरानी और पुष्टि के बाद टीम ने उसे डिटेन कर लिया।