
प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ
Leopard Radio collar: जयपुर में झालाना जंगल से निकलकर आबादी इलाकों में घुसपैठ करने वाले लेपर्ड की गतिविधियों पर अब वन विभाग हाईटेक नजर रखेगा। बढ़ते मूवमेंट और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विभाग ने लेपर्ड पर रेडियो कॉलर लगाने का निर्णय लिया है। इससे न केवल लेपर्ड की रियल टाइम लोकेशन ट्रेस की जा सकेगी, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में रेस्क्यू और नियंत्रण की कार्रवाई भी संभव होगी।
दरअसल, झालाना लेपर्ड रिजर्व में वर्तमान में करीब 40 लेपर्ड रह रहे हैं। यह जंगल शहर की घनी आबादी के बेहद समीप स्थित है, जिसके कारण आए दिन लेपर्ड का मूवमेंट आबादी इलाकों में देखा जाता है। बीते एक वर्ष में ऐसे करीब एक दर्जन मामले सामने आ चुके हैं। कई बार लेपर्ड सिविल लाइंस जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच चुका है, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन जाता है।
इन घटनाओं पर नियंत्रण के लिए वन विभाग ने रेडियो कॉलर लगाने का फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार ट्रायल बेस पर सबसे पहले उस लेपर्ड को रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा, जिसकी आबादी क्षेत्र में घुसपैठ सबसे अधिक रहती है। ट्रायल सफल रहने पर आबादी इलाकों के समीप विचरण करने वाले अन्य लेपर्ड पर भी रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। संभावना जताई जा रही है कि इसी माह ट्रायल की शुरुआत कर दी जाएगी।
रेडियो कॉलर लगने के बाद लेपर्ड की हर गतिविधि पर 24 घंटे निगरानी रखी जा सकेगी। जैसे ही कोई लेपर्ड आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ेगा, अलर्ट सिस्टम के जरिये फील्ड स्टाफ को तुरंत सूचना मिल जाएगी। इससे समय रहते रेस्क्यू, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जा सकेंगे।
वन अधिकारियों का दावा है कि राजस्थान में पहली बार लेपर्ड पर रेडियो कॉलर लगाए जा रहे हैं। यह प्रयोग सफल रहा तो इसे अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। प्रयोग सफल रहने पर आबादी क्षेत्र में हो रही लेपर्ड की घुसपैठ पर आसानी से रोक लगाई जा सकेगी।
Updated on:
1 Mar 2026, 1:34 AM IST
Published on:
1 Mar 2026, 1:34 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.