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Jaipur: होलिका दहन का कन्फ्यूजन खत्म; भद्रा में भी इस समय करें दहन, चंद्रग्रहण के बीच धुलण्डी, रंग खेलने से पहले जान लें जरूरी समय

Jaipur Holi Schedule: फाल्गुन पूर्णिमा पर होने वाले होलिका दहन को लेकर इस बार तिथि और भद्रा को लेकर काफी चर्चा हो रही है। जयपुर में दो मार्च की रात 1:26 से 2:38 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है।
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जयपुर

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Anand Prakash Yadav

•

Updated: 28 Feb 2026, 11:34 PM IST

सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ

सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ

Jaipur Holi Schedule: फाल्गुन पूर्णिमा पर होने वाले होलिका दहन को लेकर इस बार तिथि और भद्रा को लेकर काफी चर्चा हो रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में और भद्रा रहित समय में करना चाहिए। जयपुर में दो मार्च की रात 1:26 से 2:38 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है।

भद्रा में होलिका दहन व रक्षा बंधन वर्जित

ज्योतिर्विद पंडित दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी 2 मार्च को शाम 5:56 बजे से पूर्णिमा प्रारंभ होगी। पूर्णिमा तिथि 3 मार्च मंगलवार को शाम 5:08 बजे तक रहेगी। चूंकि 2 मार्च को ही प्रदोष काल में पूर्णिमा प्राप्त हो रही है, इसलिए होली पर्व का निर्धारण इसी दिन से माना जाएगा।

हालांकि 2 मार्च को शाम 5:56 बजे से भद्रा प्रारंभ होकर 3 मार्च की सुबह 5:32 बजे तक रहेगी। भद्रा में होलिका दहन व रक्षा बंधन वर्जित माना जाता है। लेकिन शास्त्रीय नियम यह भी कहता है कि यदि भद्रा निशीथ काल को पार करते हुए उषा काल तक चली जाए तो भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ में होलिका दहन किया जा सकता है।

जयपुर में भद्रा पुच्छ में होलिका दहन

ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम गौड़ और चंद्रमोहन दाधीच ने बताया कि जयपुर सहित राजस्थान में 2 मार्च की रात भद्रा पुच्छ में होलिका दहन किया जाएगा और 3 मार्च मंगलवार को धुलंडी मनाई जाएगी। 2 मार्च की रात भद्रा मुख का समय 2:38 से 4:38 बजे तक रहेगा। इस अवधि में दहन वर्जित है। भद्रा पुच्छ का समय रात 1:26 से 2:38 बजे तक रहेगा, जिसे होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इसलिए जयपुर में होलिका दहन 2 मार्च की मध्यरात्रि 1:26 से 2:38 बजे के बीच करना शास्त्र सम्मत रहेगा।

धुलंण्डी पर्व 3 मार्च को

ज्योतिषाचार्य पंडित घनश्याम लाल स्वर्णकार ने बताया कि होलिका दहन के अगले दिन ही धुलण्डी पर्व मनाया जाएगा। चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण के 09 घण्टे पूर्व लगता है किंतु ग्रहण लगा हुआ उदय हो तो सूर्योदय के साथ प्रात: 06 बजकर 53 मिनट से सूतक प्रारम्भ हो जायेगा।

धुलण्डी पर्व पर किसी प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान, पूजन आदि कार्य नहीं होता है, यह केवल रंगोत्सव पर्व है, जिसमें सूतक आदि का दोष नहीं लगता है। चन्द्रग्रहण का प्रभाव दोपहर 03 बजकर 20 मिनट से सायं 06 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, अत: इसके पूर्व ही धुलण्डी का पर्व मना लेना चाहिए। ग्रहण मोक्ष सायं 06 बजकर 48 मिनट पर होगा, उसके बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर धार्मिक कृत्य करने चाहिए।

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