कोटा

बजरी माफिया लूट रहे चंबल का ‘खजाना’, प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा खेल, इन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं

बजरी माफिया चंबल नदी के पेंदे को छलनी कर ‘खजाना’ लूट रहे हैं। ये इतने बेखौफ हैं कि धड़ल्ले से चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में नदी से बजरी खनन कर रहे हैं।
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Nov 13, 2024
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कोटा के रंगपुर घाट पर धड़ल्ले से चंबल नदी से निकाली जा रही बजरी। फोटो : नीरज

रणजीतसिंह सोलंकी/कोटा। बजरी माफिया चंबल नदी के पेंदे को छलनी कर ‘खजाना’ लूट रहे हैं। ये इतने बेखौफ हैं कि धड़ल्ले से चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में नदी से बजरी खनन कर रहे हैं। चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में इस तरह के करीब एक दर्जन प्वॉइंट हैं, जहां से अवैध रूप से बजरी निकाली जाती है। पत्रिका रिपोर्टर ने जब मौके पर पहुंचकर पड़ताल की तो कई सनसनीखेज खुलासे हुए।

अजीब बात तो यह है कि माफिया खनन विभाग, पुलिस और प्रशासन के सामने चंबल नदी के बीच से दर्जनों नाव लेकर जाते हैं। नदी के पेंदे से बजरी खनन कर नाव में भरते हैं फिर इसे नावों से ट्रैक्टर-ट्रॉली तक पहुंचाकर पूरे शहर में भेजी जाती है। अफसोस कि प्रशासन की नाक के नीचे पूरा खेल हो रहा है, लेकिन ‘इन्हें’ रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। चंबल नदी में कोटा और बूंदी जिले की सीमा में ही प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली बजरी निकाली जाती है। हैरानी की बात यह है कि बजरी माफिया नदी से अवैध रूप से बजरी निकालकर थानों और वन विभाग की चेकपोस्ट के सामने से गुजरते हैं। इससे पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

अलसुबह से सूर्यास्त तक बजरी खनन

चंबल नदी से अवैध रूप से बजरी खनन की सूचना पर अलसुबह पत्रिका टीम दुर्गम कच्चे रास्तों से रंगपुर स्थित नदी के तट पर पहुंची तो यहां चार नावों में आठ-दस लोग सवार होकर नदी में उतारने की तैयारी कर रहे थे। यहां चार-पांच ट्रैक्टर-ट्राली खड़ी कर रखी थी। नदी से बजरी निकालने के लिए विशेष तरह का औजार लेकर लोग नावों में सवार होकर गहराई तक पहुंच गए और बजरी निकालना शुरू किया। यहां अलसुबह से शाम सात बजे तक धड़ल्ले से बजरी निकाली जाती है। फिर बजरी नाव में भरकर किनारे तक लाई जाती है और यहां से ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर सप्लाई की जाती है।

इन क्षेत्रों में निकाली जाती है बजरी

नाव में बैठकर नदी पारकर बूंदी जिले की सीमा में पहुंचे तो अभयारण्य क्षेत्र में बजरी खनन किया जा रहा था। बजरी का परिवहन कोटा में किया जा रहा था। चंबल से सटा होने के कारण बजरी से भरी ट्रॉलियों को सुल्तानपुर इलाके से निकाला जा रहा था।

आरके खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक, कोटा से सवाल-जवाब
Q : चंबल नदी व घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में बजरी का अवैध खनन हो रहा है, रोकने के क्या प्रयास हुए?

सीसीएफ : अवैध खनन को रोकने के लिए विभाग की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। अवैध खनन क्षेत्रों को चिह्नित कर पिछले दिनों काफी कार्रवाई की है।

Q : दिन में भी नावों को चंबल में उतारकर अवैध रूप से बजरी निकाली जाती है, क्यों नहीं रोक पाते?

सीसीएफ : ऐसा नहीं है, विभाग की ओर से अवैध खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इससे अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगा है।

Q : अवैध खनन रोकने के लिए कितनी टीमें लगा रखी हैं?

सीसीएफ : संबंधित डीएफओ को निगरानी के निर्देश दे रखे हैं। अवैध खनन पर कार्रवाई होती है। फिर भी खनन की शिकायत आती है तो संबंधित अधिकारियों पर एक्शन लिया जाएगा।

Updated on:
13 Nov 2024 05:54 pm
Published on:
13 Nov 2024 05:54 pm