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ईरान-इजरायल युद्ध के बीच राजस्थान के किसानों के लिए बड़ी खबर, मंडियों में मचा हाहाकार, जानें अब क्या होगा

ईरान-इजरायल के बीच युद्ध का असर राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र तक पहुंच गया है। भामाशाह अनाज मंडी में बासमती चावल के दाम दो दिन में पांच हजार रुपए टन कम हो गए। ऐसे में किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।

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कोटा

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Arvind Rao

Mar 03, 2026

Iran-Israel War Impact in Rajasthan Basmati Exports Halted from Bhamashah Mandi kota Prices Drop 5000 per Ton

बासमती चावल का एक्सपोर्ट ठप (फोटो- एआई)

Iran-Israel War: पश्चिमी एशिया में जारी सैन्य तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब सात समंदर पार राजस्थान के खेतों और मंडियों तक पहुंच गया है। राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र, जिसे बासमती चावल के गढ़ के रूप में जाना जाता है, वहां के किसानों और व्यापारियों की रातों की नींद उड़ गई है। खाड़ी देशों, विशेषकर ईरान को होने वाला बासमती का निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे स्थानीय बाजारों में हाहाकार मचा है।

एशिया की सबसे बड़ी मंडियों में शुमार कोटा की भामाशाह अनाज मंडी इन दिनों वैश्विक युद्ध की मार झेल रही है। खाड़ी देशों में युद्ध के हालात बनने से शिपमेंट रुक गए हैं। निर्यातकों के अनुसार, बंदरगाहों तक पहुंचा माल वहीं अटक गया है।

इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। महज दो दिनों के भीतर बासमती चावल के दाम 5,000 रुपए प्रति टन तक गिर गए हैं। कीमतों में आई इस भारी गिरावट ने व्यापारियों और किसानों दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

क्यों अटका है कोटा का बासमती?

हाड़ौती का बासमती चावल अपनी खुशबू और स्वाद के लिए खाड़ी देशों में बेहद मशहूर है। यहां के धान का एक बड़ा हिस्सा निर्यात पर निर्भर है। वर्तमान में युद्ध के चलते बैंकिंग चैनल्स और शिपिंग रूट्स प्रभावित हुए हैं, जिससे पुराने पेमेंट फंस गए हैं। अनिश्चितता के माहौल में अंतरराष्ट्रीय खरीदार नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं। निर्यातकों का कहना है कि अगर स्थिति लंबी खिंची, तो स्टॉक अटकने से कैश फ्लो रुक जाएगा, जिसका सीधा दबाव किसानों पर पड़ेगा।

किसानों की बढ़ी चिंता, यूक्रेन युद्ध की यादें हुई ताजा

मंडी में धान लेकर पहुंच रहे किसानों को अब अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है। हालांकि, अनुभवी व्यापारियों का कहना है कि ऐसे हालात पहले भी देखे गए हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान भी सप्लाई चेन टूटी थी, लेकिन धीरे-धीरे बाजार संभल गया था। व्यापारियों को उम्मीद है कि जैसे ही पश्चिम एशिया में शांति बहाल होगी, हाड़ौती का बासमती फिर से खाड़ी देशों की थाली की शोभा बढ़ाएगा।

क्या और गिरेंगे दाम?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स और इंश्योरेंस की लागत बढ़ने से बासमती और भी सस्ता हो सकता है। फिलहाल, हाड़ौती का चावल कारोबार पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति के रहमों-करम पर है।