
कोटा . Kota University और गड़बड़ी का जैसे पुराना नाता है। भर्ती घोटाले से चर्चा में आए कोटा विवि में नियुक्ति का नया गड़बड़झाला सामने आया है। पहले तो कर्मचारियों की भर्ती में खुद कुलपति, अधिकारियों और बोम सदस्यों पर भाई भतीजेवाद के आरोप लगे, लेकिन अब तो खुद कुलपति की नियुक्ति में ही गड़बड़ी बताई जा रही है। कोटा विवि के कुलपति पीके दशोरा की नियुक्ति को यूजीसी के दिशानिर्देशों के विपरीत बताते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, राज्य सरकार, कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.के. दशोरा को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न कुलपति की नियुक्ति को रद्द कर दिया जाए? याचिका में उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को गलत बताया गया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने कृषि विवि के कुलपति को नोटिस जारी किया है।
चार सप्ताह में मांगा है जवाब
कोर्ट ने दोनों कुलपतियों की नियुक्ति को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के विपरीत बताने वाली याचिका पर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। न्यायाधीश मनीष भंडारी ने अधिवक्ता गणेश चतुर्वेदी की याचिका पर यह आदेश दिया है। याचिका में कोटा विवि के कुलपति डॉ. पी.के. दशोरा और उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा की नियुक्ति को चुनौती दी गई है।
पद के लिए आधा ही अनुभव
प्रार्थीपक्ष के अधिवक्ता उदयप्रदीप गौड़ ने कोर्ट को बताया कि यूजीसी गाइडलाइंस के अनुसार लगातार दस साल तक प्रोफेसर रहते हुए अध्यापन या रिसर्च का अनुभव रखने वाले शिक्षक ही कुलपति की नियुक्ति के योग्य हैं। पी के दशोरा और उमाशंकर शर्मा 2009 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नत हुए और 2014 में सेवानिवृत्त हो गए। 2015 में उनको कुलपति नियुक्त कर दिया गया। याचिका में कहा गया कि दोनों को ही करीब पांच साल तक प्रोफेसर रहने का अनुभव है।
एक को पद मिला तो दूसरे का किया भला
कोटा विवि के कुलपति बनने के बाद डॉ. पी.के. दशोरा कुछ दिन के लिए महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि उदयपुर के कार्यवाहक कुलपति भी रहे थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि दशोरा ने इस विवि के कुलपति रहने के दौरान ही अपनी और उमाशंकर शर्मा की वरिष्ठता 2009 के स्थान पर 2004 से करने के आदेश जारी करवाए।
राजभवन पहुंचा मामला
डॉ. उमाशंकर शर्मा के कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति पद पर नियुक्ति में नियमों की अनदेखी को लेकर राज्य सरकार औेर कुलाधिपति (राज्यपाल) के पास भी शिकायत पहुंच गई है। इनकी कई शिकायत राजभवन पहुंच चुकी हैं। दर्जनभर विधायकों ने राजभवन को शिकायत भेजी है।