कोटा

आज़ादी से पहले बनी कोटा की इस बस्ती में आज भी है गावं से हालात

सोगरिया पहले भी गांव था और आज भी हालात गांव जैसे ही हैं। आज भी यहां के लोगों को करना पड़ रहा है कई मूलभूत समस्याओं का सामना

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Jan 31, 2018

कोटा . सोगरिया पहले भी गांव था और आज भी हालात गांव जैसे ही हैं। नगर निगम क्षेत्र में आने के बाद भी यहां के लोगों को मूलभूत समस्याओं तक का लाभ नहीं मिल रहा। निर्दलीय पार्षद होने का दंश भी यहां की जनता भुगत रही है।

आजादी के पहले की बसी सोगरिया बस्ती में प्रमुख समस्या सड़क व नालियों की है। यहां सड़क नहीं होने से बरसात में बस्ती तालाब बन जाती है। बरसात से पहले खाली प्लाट तालाब में तब्दील हो जाते हैं। अब जनता का गुबार निकलने लगा है। लोगों का साफ कहना है कि कोई वोट मांगने आएगा तो उलटे पैर ही जाना पडेग़ा। समस्या का हल नहीं होगा तो वोट नहीं देंगे। निगम में आने के बाद भी सोगरिया में कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिला। मुख्य मार्ग उखड़ा पड़ा है। वाहन निकलते समय धूल उड़ती है। सड़क 20 साल से उखड़ी पड़ी है। बच्चो के लिए एक भी पार्क नहीं है।

खोखले साबित हो रहे हैं यहां स्व'छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी के दावे
स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी के चौतरफा बज रहे ढोल के बीच सोगरिया में इस ओर कोई ध्यान नहीं है। कॉलोनी में नगर निगम की ओर से कोई कचरा पाइंट नहीं बनाया गया है। कचरा निर्धारित जगह पर भी नहीं डाला जा रहा। ये जगह-जगह फैला रहता है। जिसके जहां कहीं जमी, लोगों ने खाली भूखंडों को ही कचरा पाइंट बना लिया। लागों ने बताया कि निगम के सफाई कर्मचारी यहां से समय पर कचरा भी नहीं उठाते हैं। स्वच्छ भारत मिशन की खुलेआम ध"िायां उड़ाई जा रही है।

आज भी खरंजे
गांवों में पहले खरंजे ही बनाए जाते थे, ताकी बेलगाडिय़ां उस पर से आसानी से निकल सकें। वही स्थिति आज भी है। गली नम्बर 8 व 9 में जनता आज भी सड़क के लिए तरस रही है। इसके साथ ही रोड लाइटें नहीं होने से भी रात को गिरने का भय बना रहता है। कई लोग गिर भी
चुके हैं।


स्थानीय निवासी रेखा का कहना है कि पानी का निकास नहीं होने से पानी बाहर फैला रहता है। सड़क भी नहीं है। सोगरिया निगम सीमा में तो आ गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा।

स्थानीय निवासी सुनील का कहना है कि खाली पड़े भूखंडों में पानी भरा रहता है जिस कारण म'छर पनपते हैं और ब"ों बीमार होते हैं। इस बार वोट डालने नहीं जाएंगे। नेता आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं।

स्थानीय निवासी चतुर्भज खंगार का कहना है कि करीब 20 सालों से सड़कें नहीं है। खरंजे खराब हो चुके हैं। यहां से निकलना दुश्वार हो गया है। नालियों का पानी बाहर निकलता है।


स्थानीय निवासी भगवान ङ्क्षसह का कहना है कि कीचड़ में से होकर निकलना पड़ रहा है। सभी से शिकायत की लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ । 20 सालों से यहां के निवासी परेशानियों में ही जी रहे हैं।

स्थानीय निवासी हजारी लाल का कहना है कि घरों में जाने के लिए भी पानी के बीच से होकर जाना पड़ता है। चारों तरफ गंदा पानी भरा है। करीब 25 सालों से परेशान हो रहे हैं। कहीं सुनवाई नहीं है।


समाधान का प्रयास करेंगे
वार्ड 10 पार्षद के दीनदयाल चौबदार का कहना है कि अब तक करीब 13 करोड़ 42 लाख के कार्य हो चुके हैं। शीघ्र ही 96 लाख से कई कार्य होंगे। रेत नहीं आने से कार्य रुके पड़े हैं। समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा।

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Updated on:
31 Jan 2018 07:15 pm
Published on:
31 Jan 2018 05:54 pm
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