कोटा में एक हजार करोड़ की लागत से बनने वाले ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शुक्रवार को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में त्रिपक्षीय एमओयू हो गया है।
Kota News: कोटा में बनने वाले ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में त्रिपक्षीय एमओयू हो गया। एयरपोर्ट को बनाने में करीब 1000 करोड़ रुपए की लागत आएगी। छह माह बाद निर्माण शुरू होगा। करीब दो से ढाई साल में यह बनकर तैयार हो जाएगा। इसके तुरंत बाद उड़ानें शुरू हो जाएंगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय में कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विकास को लेकर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, नगरीय विकास विभाग एवं नागरिक उड्डयन विभाग के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शिक्षा एवं उद्योगों की नगरी कोटा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण से हाडौती अंचल के लाखों निवासियों को हवाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
उन्होंने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष से आग्रह किया कि जयपुर एयरपोर्ट पर नए स्टेट टर्मिनल के लिए शीघ्र कार्य शुरू करें। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव कुमार, नागरिक उड्डयन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल एवं नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी.रविकान्त ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
राजस्थान सरकार कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण के लिए भूमि निःशुल्क उपलब्ध करवाएगी। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण, विकास एवं संचालन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की होगी। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को एयरपोर्ट के सर्वे की अनुमति दे दी है। साथ ही, एयरपोर्ट की प्रस्तावित भूमि में से पीजीसीआईएल (पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) की 400 केवी की हाईटेंशन लाइन शिफ्ट करने की आवश्यक कार्रवाई हो चुकी है।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव कुमार ने बताया कि कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। इसके बाद टेण्डर आमंत्रित किए जाएंगे।
नगरीय विकास विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकान्त ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण 440.086 हैक्टेयर भूमि पर किया जाएगा। कोटा विकास प्राधिकरण की परिधि सीमा में यह भूमि राजस्व ग्राम तुलसी, कैथुदा, बालापुरा एवं देवरिया, जिला बूंदी में स्थित है। इसमें से 406.678 हैक्टेयर वन भूमि एवं 33.408 हैक्टेयर गैर वन भूमि कोटा विकास प्राधिकरण के स्वामित्व की है।