
कोटा। राजस्थान को जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से लैस एक हाईटेक जिला न्यायालय परिसर मिलने जा रहा है। कोटा में 290 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनने वाला यह एकीकृत कोर्ट कॉम्प्लेक्स प्रदेश के सबसे बड़े और आधुनिक न्यायालय परिसरों में शामिल होगा। यहां 54 अदालतें एक ही परिसर में संचालित होंगी। न्यायिक कामकाज के लिए डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आधुनिक सम्मेलन कक्ष जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था एयरपोर्ट की तर्ज पर होगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने रविवार को इस परियोजना का शिलान्यास किया।
नया परिसर केवल भव्य भवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और वादकारियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। पार्किंग, लाइब्रेरी, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य जरूरी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी। परियोजना को जुलाई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 3.21 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। मुख्य भवन का क्षेत्रफल करीब 4.47 लाख वर्गफीट होगा।
न्यायालय परिसर में बेसमेंट, भूतल और पांच मंजिलें होंगी। भवन में कुल 11 लिफ्ट लगाई जाएंगी और पूरा परिसर वातानुकूलित रहेगा। पार्किंग की क्षमता 1468 वाहनों की होगी। इसमें 734 कारों और 734 बाइक-स्कूटर के लिए जगह निर्धारित की गई है। स्टेशन रोड से कोर्ट परिसर तक पहुंच आसान बनाने के लिए 80 फुट चौड़ी चार लेन की कनेक्टिंग सड़क भी बनाई जाएगी। सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर लगाए जाएंगे। तीन स्थानों पर सामान की जांच के लिए मशीनें स्थापित होंगी। भवन में आग से बचाव और अग्निशमन की आधुनिक प्रणाली रहेगी। बिजली की अनुमानित जरूरत 4.5 मेगावाट होगी। इसके लिए 250 किलोवॉट क्षमता का सोलर प्लांट भी लगाया जाएगा।
शिलान्यास समारोह में ओम बिरला ने कहा कि नया न्यायालय परिसर बनना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन न्याय व्यवस्था की असली सफलता आम आदमी को सरल, सुलभ, त्वरित और निष्पक्ष न्याय मिलने में है। अदालत में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान के साथ बैठने और अपनी बात रखने की सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए न्यायपालिका, अधिवक्ताओं और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्थानों पर न्यायालय संचालित होने से लोगों को परेशानी होती है। अब सभी न्यायालय एक ही परिसर में होंगे। अधिवक्ता कक्षों के निर्माण की निविदा प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। बिरला ने बताया कि कोर्ट के साथ मिनी सचिवालय बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है, ताकि लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग-अलग जगहों पर नहीं जाना पड़े।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल ने कहा कि न्यायालय की पहचान उसकी इमारत से नहीं, बल्कि निष्पक्ष न्याय से होती है। नए परिसर में महिलाओं, दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर वर्गों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक न्यायिक व्यवस्था के लिए जरूरी है, लेकिन यह न्याय का विकल्प नहीं हो सकती। न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को पुराने लंबित मुकदमों के जल्द निस्तारण पर भी ध्यान देना चाहिए।
कोटा के संरक्षक न्यायाधीश सुदेश बंसल ने अधिवक्ताओं के लिए चैंबर और बैठने की बेहतर व्यवस्था की जरूरत बताई। उन्होंने आग्रह किया कि ऐसी सुविधा प्रदेश के सभी जिलों में विकसित की जाए। विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि नए परिसर में वादकारियों और अधिवक्ताओं को आधुनिक सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। समारोह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमराज गौड़, अभिभाषक परिषद अध्यक्ष भारत सिंह अडसेला, महासचिव शम्भू सोनी सहित कई न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ता मौजूद रहे।