
कोटा. मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में भर्ती एक महिला की शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद शनिवार सुबह मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिसर में धरना शुरू कर दिया। उनके समर्थन में महिला कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष शालिनी गौतम भी धरने पर बैठ गईं। करीब आधे घंटे बाद समझाइश पर परिजन धरने से उठे। इसके बाद अधीक्षक को ज्ञापन देकर मृतका के परिवार को मुआवजा दिलाने, संबंधित स्टाफ पर कार्रवाई और मामले की जांच की मांग की गई।
संतोषी नगर निवासी मृतका के पति सुरेंद्र ने बताया कि उसकी पत्नी रेखा को करीब तीन साल पहले टीबी की बीमारी हुई थी, जो ठीक हो गई थी। 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। हाथ-पैर में दर्द और बुखार की शिकायत थी। सुबह करीब 9 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन तक उसे श्वास रोग वार्ड में रखा गया। इसके बाद डॉक्टरों ने दोनों किडनी फेल होने की बात बताई और उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। रेखा को सांस लेने में परेशानी थी और बीपी भी काफी कम हो गया था। उसे जीवनरक्षक इंजेक्शन दिए जा रहे थे।
सुरेंद्र का आरोप है कि शुक्रवार रात करीब 2 बजे आईसीयू में रेखा को मशीन से दिया जा रहा इंजेक्शन खत्म हो गया। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंगकर्मी व स्टाफ को इसकी जानकारी दी और इंजेक्शन दोबारा लगाने के लिए कहा। सुरेंद्र के अनुसार, उन्होंने हाथ जोड़कर मिन्नतें की, लेकिन समय पर दवा नहीं दी गई। उनका आरोप है कि करीब 20 मिनट बाद स्टाफ आया, लेकिन इंजेक्शन नहीं बदला। इस दौरान दूसरी मशीन से दूसरा इंजेक्शन चल रहा था। तड़के करीब 5 बजे वह इंजेक्शन भी खत्म हो गया। इसकी सूचना वार्ड स्टाफ को दी गई। परिजनों के अनुसार, काफी देर बाद स्टाफ आया और मशीन बंद कर दी। इसके करीब 15 मिनट बाद ही रेखा की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि समय पर जरूरी दवा मिल जाती तो शायद रेखा की जान बच सकती थी। रेखा अपने पीछे तीन बेटियां और एक बेटा छोड़ गई है। उसकी मौत के बाद पति सुरेंद्र के सामने चार छोटे बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई है। परिजनों का कहना है कि परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
महिला कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष शालिनी गौतम ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि रात को इंजेक्शन खत्म होने के बाद अटेंडर वार्ड बॉय को बुलाने गया, लेकिन काफी देर तक वह नहीं आया। उन्होंने कहा कि वार्ड बॉय की जिम्मेदारी है कि वह मरीज की स्थिति पर नजर रखे और जरूरत होने पर संबंधित डॉक्टर को सूचना दे। उन्होंने कहा कि यदि वार्ड के स्टाफ की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं हों।
नए अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि रेखा पहले से श्वास रोग से पीड़ित थी और अस्पताल में भर्ती होने के समय भी उसकी हालत गंभीर थी। दो दिन से उसे डोपामाइन और नॉरएड्रेनालाइन जैसी जीवनरक्षक दवाएं दी जा रही थी तथा वेंटिलेटर के सहारे इलाज चल रहा था। आईसीयू में रेजिडेंट, नर्सिंग स्टाफ और वार्ड बॉय मौजूद थे। उन्होंने कहा कि लापरवाही जैसी कोई बात सामने नहीं आई। हालांकि परिजनों ने मुआवजा और संबंधित स्टाफ पर कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन दिया है। मामले की जांच की जा रही है।