कोटा

देखिए एक N.O.C की ताकत ठहरी पड़ी फल सब्जीमंडी , पढ़िए पूरा मामला..

थोक फल सब्जीमंडी के चंद्रेसल में स्थानांतरण का मामला जमीन की एनओसी नहीं देने के कारण अटका , मंडी प्रशासन ने सम्बंधित विभागों से मांगी एनओसी

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Jan 23, 2018
panna district sabji mandi

कोटा . थोक फल सब्जीमंडी के चंद्रेसल में स्थानांतरण का मामला जमीन की एनओसी नहीं देने के कारण अटका हुआ है। कृषि विपणन विभाग के निर्देश पर मंडी प्रशासन ने सम्बंधित विभागों से एनओसी मांगी है। लेकिन सम्बंधित विभाग एनओसी देने में आनाकानी करते नजर आ रहे हैं।

एनओसी के मामले में मंडी प्रशासन ने करीब एक माह पहले यूआईटी व वन विभाग को पत्र लिखा था। वन विभाग के अधिकारियों ने मौखिक रूप से तो अनापत्ति जता दी, लेकिन लिखित में देने के लिए मंडी प्रशासन से जमीन के खसरा नम्बर, ले आउट प्लान, नक्शा-नकल आदि दस्तावेज मांगे। उक्त दस्तावेज प्राप्त करने के लिए जब मंडी प्रशासन ने यूआईटी को पत्र लिखा, लेकिन अभी तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। मंडी प्रशासन ने कई बार यूआईटी के अधिकारियों से पत्र व्यवहार भी किया।

अभयारण्य सीमा हुई तो आएगी परेशानी

सूत्रों के अनुसार थोक फल सब्जीमंडी को जिस जगह स्थानांतरित किया जाना है। उससे कुछ ही दूर चंद्रलोई व चम्बल नदी है। चंद्रलोई नदी में मगरम'छों का बसेरा है, वहीं चम्बल नदी घडिय़ाल अभयारण्य सीमा में आती है। ऐस में कृषि विपणन विभाग को आशंका है कि यूआई से जमीन आहरित करने, जमीन की लागत का पूरा भुगतान करने के बाद अगर वन विभाग, वन्यजीव विभाग ने आपत्ति जता दी तो कुछ नहीं किया जा सकता। ऐसे में जमीन आहरित करने से पहले ही सभी विभागों से एनओसी ले जी जाए।

भामाशाह मंडी के पास हो शिफ्ट

थोक फ्रूट एंड वेजिटेबल मर्चेंट संघ के महासचिव संतोष मेहता का कहना है कि चंद्रेसल के बजाय मंडी को भामाशाह मंडी के पास स्थानांतरित किया जाए। किसान सब्जी, लहसुन, अनाज को एक ही वाहन में लेकर आते हैं। अगर दोनों मंडियां पास-पास होंगी तो किसानों को उपज बेचने में परेशानी नहीं होगी। मंडी के पास फोरलेन, ट्रांसपोर्टनगर, शहर भी नजदीक है। उन्होनें मांग की कि भामाशाह मंडी समिति मंडी परिसर से सटी वन विभाग की जमीन मांग रही है। वहीं उनका कहना है कि फोरलेन के बाहरी ओर थोकफल सब्जी मंडी के लिए जमीन आवंटित कर दी जाए।

कोटा थोक फल सब्जीमंडी के सचिव डॉ. हेमलता मीना का कहना है कि 20 दिसम्बर को कृषि विपणन विभाग के निदेशक ने मिटिंग लेकर सम्बंधित विभागों से एनओसी लेने के निर्देश दिए थे। हमने यूआईटी व वन विभाग को एनओसी के लिए पत्र लिख दिए। कई बार सम्पर्क भी किया। वन विभाग ने चंद्रेसल की जमीन के खसरा नम्बर व अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे हैं, जो यूआईटी ने अभी तक भी उपलब्ध नहीं कराए हैं।

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Updated on:
23 Jan 2018 07:20 pm
Published on:
23 Jan 2018 07:18 pm
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