Patrika Amrit-Jalam Abhiyan: विधायक शर्मा ने कहा कि यह आने वाले कल के लिए बहुत गम्भीर विषय है। इसके लिए पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी धन्यवाद के पात्र हैं। जो अमृतं- जलम़ं अभियान एवं हरयाळो राजस्थान के तहत हमारी प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित करने का काम कर रहे हैं।
MLA Sandeep Sharma: कोचिंग सिटी कोटा में रियासतकालीन 19 तालाब में से केवल चार ही बचे हैं। कहीं अतिक्रमण हो गए, तो किसी पर कॉलोनी ही काट दी। महुआ, कोटड़ी, रानीसागर, झेला और रामकुंड जैसे कई तालाबों का तो रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं है।
विधानसभा में सोमवार को शून्यकाल में कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने इन तालाबों में हो रहे अतिक्रमण और दुर्दशा का मुद्दा उठाते हुए परम्परागत जलस्रोतों के संरक्षण की मांग उठाई।
विधायक ने कहा कि आने वाले पीढ़ियों के लिए जल संरचनाओं को सहेजना जरूरी है। विधायक ने राजस्थान पत्रिका के अमृतं-जलम् अभियान की सराहना करते हुए कहा कि जलस्रोतों के संरक्षण और जागरुकता के लिए हर बार पत्रिका की ओर से पूरे प्रदेश में अभियान चलाया जाता है और लोगों को जोड़कर श्रमदान किया जाता है।
विधायक ने सदन में नियम 131 के तहत ध्यानाकर्षण के जरिए यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि रियासत काल में कोटा शहर में कुल 19 तालाब थे। जब पठारी क्षेत्र से बरसात का पानी आता था तो यह तालाब उस जल को संरक्षित कर लेते थे और कोटा जल प्लावन से बचा रहता था।
साथ ही ये तालाब कोटा शहर के भूजल स्तर में भी इजाफा करते थे। आज 19 में से महज 4 तालाब बचे हुए हैं, बाकी तालाबों में या तो अतिक्रमण कर लिया गया या पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने उनमें कॉलोनी काट दी।
काला तालाब और गणेश तालाब में कॉलोनी काट दी गई तो अनन्तपुरा तालाब में अतिक्रमण हो गया। कई तालाबों में तो यूआइटी ने ही कॉलोनियां काट दी हैं। ऐसे में आज हमारे भूजल स्तर की बहुत खतरनाक स्थिति है। हमारे अधिकांश ब्लॉक डार्क जोन में हैं।
विधायक शर्मा ने कहा कि यह आने वाले कल के लिए बहुत गम्भीर विषय है। इसके लिए पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी धन्यवाद के पात्र हैं। जो अमृतं- जलम़ं अभियान एवं हरयाळो राजस्थान के तहत हमारी प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित करने का काम कर रहे हैं। कई लोगों, संस्थाओं और आम जन को जोड़कर उन्हें इस दिशा में प्रेरित कर कर रहे हैं। इसीलिए आज हम तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
जवाब में नगरीय विकास राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने विधानसभा में कहा कि विरासतकालीन तालाबों और जल संग्रहण स्रोतों का संरक्षण और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। कोटा विकास प्राधिकरण ने किशोर सागर तालाब के सौंदर्यकरण के लिए कार्य आदेश जारी किए हैं।
इसके विकास कार्यों पर 82.31 करोड़ रुपए की लागत आएगी। उन्होंने कहा कि कोटा के अन्य जल संग्रहण स्रोतों का सर्वे के आधार पर संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने माना कि कोटा में प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में कॉलोनियां बसने से प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम अवरुद्ध हुआ है।
खर्रा ने सदन को आश्वस्त किया कि कोटा क्षेत्र के सभी तालाबों का सैटेलाइट फोटो से अवलोकन करेंगे। जिसके आधार पर रेकॉर्ड में दर्ज तालाबों की वर्तमान स्थिति की जांच करते हुए उन्हें पुनर्जीवित करने की दिशा में कार्य किए जाएंगे। साथ ही, अन्य तालाब क्षेत्रों में अतिक्रमण नहीं हो और उन्हें संरक्षित रखा जाए, इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक कार्यवाही कर रही है।
राजस्थान पत्रिका ने कोटा के रियासतकालीन तालाबों और बांधों के संरक्षण के लिए ‘बांधों को मत बांधों’ अभियान शुरू किया था। इसमें जिले के रियासतकालीन जलस्रोतों पर हो रहे अतिक्रमण और दुर्दशा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।