कोटा

Kota: रॉन्ग नंबर से आए कॉल पर बढ़ीं थी महिला की नजदीकियां, प्रेमी के साथ रहने लगी; बेटी का मर्डर किया

Kota Court Sentence Life Imprisonment: 4 साल की बेटी की हत्या के मामले में उसकी मां और प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा मिली है। जांच में सामने आया कि रॉन्ग नंबर से शुरू हुई बातचीत के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और घायल बच्ची के इलाज का खर्च उठाने से बचने के लिए उसकी हत्या कर दी।
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Updated: 20 Jun 2026, 7:56 AM IST
Kota Murder Case
गिरफ्तार आरोपियों की फोटो: पत्रिका

Mother And Her Lover Killed 4 Year Daughter: अपर सेशन न्यायाधीश क्रम संख्या-2 की पीठासीन अधिकारी सरिता धाकड़ ने 4 साल की बेटी के मुंह पर शॉल रखकर उसकी हत्या करने के मामले में आरोपी मां व उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। अपर लोक अभियोजक भारत सिंह आसावत ने बताया कि शहर के बोरखेड़ा निवासी परिवादी सुमित यादव ने दिसंबर 2020 को कोटा ग्रामीण के बूढ़ादीत थाने में दर्ज करवाई शिकायत में बताया कि वर्ष 2016 में उसका विवाह टीना उर्फ पुष्पा से हुआ था। उनकी चार वर्ष की बेटी नंदिनी है। 11 नवंबर 2020 को टीना बेटी नंदनी को लेकर बिना बताए घर से कहीं चली गई। उसने काफी तलाश किया, लेकिन उनका पता नहीं चला। ससुराल में फोन करके पूछा तो दोनों की कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर दोनों की तलाश शुरू की।

कोटा ग्रामीण पुलिस को 5 माह की जांच के बाद पता चला कि टीना जयपुर के उदावाला गांव में है। पुलिस ने उदावाला पहुंचकर टीना को दस्तयाब (बरामद) किया। पुलिस ने जब टीना और उसके प्रेमी प्रहलाद से नंदनी के बारे में पूछा तो टीना ने नंदनी को उसके दादा-दादी के पास भेजना बताया। पुलिस ने दादा-दादी से बात की तो राज खुल गया।

पुलिस पूछताछ में टीना और प्रहलाद टूट गए और नंदनी की हत्या की बात कबूल कर ली। उन्होंने हत्या कर शव को अलवर के सरिस्का जंगल में फेंकने की बात कही। पुलिस ने जंगल से नंदिनी की खोपड़ी और मौजे बरामद किए।

दोनों का था अफेयर

पुलिस जांच में पता चला कि टीना का प्रहलाद सहाय से अफेयर था। दोनों का परिचय रॉन्ग नंबर से आए फोन से हुआ और धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ गई। प्रहलाद के बुलाने पर टीना बेटी नंदनी को लेकर जयपुर चली गई, जहां से प्रहलाद दोनों को अपने घर ले आया। इस दौरान 9 दिसम्बर 2020 को नंदिनी सीढ़ियों से गिरकर गंभीर घायल हो गई। चिकित्सकों ने बड़े अस्पताल में नंदिनी का उपचार करवाने की सलाह दी। इसके बाद दोनों ने उपचार के खर्च से बचने के लिए नंदिनी के मुंह पर शॉल रखकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने डीएनए सैम्पल की जांच के आधार पर उसकी पहचान की।

13 गवाह और 46 सबूत पेश किए

मामले के जांच अधिकारी हैड कांस्टेबल सुरेश चंद ने 14 मई 2021 को जांच रिपोर्ट पेश की, जिसके आधार पर प्रहलाद और टीना के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया गया। अनुसंधान के बाद पुलिस ने 18 अगस्त 2021 को दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह और 46 सबूत पेश किए। पीठासीन अधिकारी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोनों को हत्या का दोषी पाया और शुक्रवार को दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और 30-30 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।

बच्चे मां के पास सुरक्षित नहीं तो वे और कहां सुरक्षित रहेंगे?

पीठासीन अधिकारी सरिता धाकड़ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘टीना उर्फ पुष्पा ने मातृत्व को शर्मसार किया है। एक मां द्वारा ही अपनी बेटी को मारकर अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसे जंगल में फेंक दिया गया। जब बच्चे अपनी मां के पास ही सुरक्षित नहीं हैं तो वे और कहां सुरक्षित रहेंगे? यह बहुत ही सोचनीय विषय है। इस तरह की औरतें मां के नाम पर कलंक हैं जो न तो मां कहने के लायक हैं और न ही इन्हें स्वतंत्र रहने का अधिकार है।’

Updated on:
20 Jun 2026, 7:56 AM IST
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