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खुशखबरी: पर्यटकों के लिए किसी भी वक्त खुल सकते हैं मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दरवाजे, रास्ते में चुनौतियां भी हैं

Mukandra Hills Tiger Reserve : मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व को जल्द ही पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।
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Updated: 5 Oct 2019, 9:58 AM IST
Mukandra Hills Tiger Reserve
खुशखबरी: पर्यटकों के लिए किसी भी वक्त खुल सकते हैं मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दरवाजे

कोटा. मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व ( Mukandra Hills Tiger Reserve ) को जल्द ही पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। बारिश के कारण जुलाई से सितम्बर तक रिजर्व पर्यटक ( tourists ) गतिविधियों के लिए बंद था। अब सरकार की योजना के तहत इसी माह कभी भी पर्यटकों के लिए टाइगर रिजर्व के दरवाजे खोले जा सकते हैं, ( Tiger Reserve ) इससे वन्यजीव प्रेमियों का बाघों को देखने का इंतजार पूरा हो सकता है।

वन एवं पर्यावरण प्रेमी व हाड़ौती के लोगों को टाइगर रिजर्व में को लेकर काफी उत्सुकता है, लेकिन इन सभी के बावजूद रिजर्व विभिन्न मुश्किलों से गुजर रहा है। एक ओर जहां टाइगर रिजर्व को पर्यटकों के लिए खोला जाना है, वहीं इन चुनौतियों के चलते बाघों की सुरक्षा को लेकर भी वन्यजीव प्रेमी काफी चिंतित हैं। सरकार को टाइगर रिजर्व को खोलने के साथ इसके विकास में आ रही बाधाओं को भी दूर करना होगा।


चुनौती 01 : बाघों की सुरक्षा भगवान भरोसे
मुकुन्दरा में बाघों की मॉनिटरिंग करने को वनकर्मी पदों की तुलना में 50 फीसदी भी नहीं हैं। इन कर्मचारियों के तबादले होने के बाद दूसरा कोई नहीं आता। इसके चलते लगातार पद रिक्त होते जा रहे हैं। हाल ही करीब 20 वन कर्मियों के तबादले हुए हैं। हालात ये हैं कि सितम्बर के अंतिम सप्ताह तक वनरक्षकों के 111 पदों में से 37 पद रिक्त हैं। जानकारी के अनुसार इसके बाद भी वनकर्मियों के तबादलों का सिलसिला थम नहीं रहा है। करीब 50 फीसदी वनकर्मियों के पद रिक्त हो गए हैं। इन हालातों में बाघों की सुरक्षा भगवान भरोसे हो रही है।

चुनौती 02 : रेल पटरियों का नहीं हुआ इलाज
रिजर्व से गुजरता रोड और रेलगाडिय़ों की धकधक वन्यजीवों के लिए खतरा बनी हुई है। टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली पटरियों पर वन्यजीवों की मौत के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल कम से कम एक वन्यजीव की मौत पटरियों पर हो रही है। न रेलवे विभाग का इस ओर ध्यान है, न ही वन विभाग का। हालांकि फिलहाल एक जोड़ा 82 वर्ग किमी में विचरण कर रहा है, दूसरा खुले में घूम रहा है, लेकिन और बाघों की बसावट होती है तो पटरियां मुश्किल बन सकती हैं। वर्ष 2003 में रणथम्भौर से निकलकर टाइगर रिजर्व में पहुंचे बाघ की मौत समेत वर्ष 2003 से अब तक एक दर्जन से अधिक वन्यजीवों की पटरियों पर मौत हुई है। इसी वर्ष जनवरी में एक सांभर की जान गई थी। दरा में अबली मीणी के महल से दरा स्टेशन तक डेंजर जोन है। यहां रेलवे ट्रेक के दोनों ओर तीन फीट चौड़ा व छह फीट गहरा नाला है। दरा में करीब 7 किमी लम्बी रेलवे लाइन गुजर रही है।

चुनौती 03 : बाघों को खतरा, ग्रामीण भी परेशान
रिजर्व में बाघों की बसावट हुए डेढ़ साल से अधिक का समय हो गया। चार बाघ विचरण कर हैं, इनमें से बाघों का एक जोड़ा खुले वन क्षेत्र में विचरण कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद सरकार अब तक टाइगर रिजर्व में आने वाले गांवों का विस्थापन नहीं कर सकी है। रिजर्व में 14 गांव हैं। अप्रेल 2013 में टाइगर रिजर्व बनने के बाद से अब तक महज दो गांवों का ही विस्थापन हुआ है। इससे भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामीण पर्याप्त मुआवजे की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार ने इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि टाइगर रिजर्व बनने के बाद गांवों के अधिकारों को भी अधिग्रहित कर लिया गया है, इन हालातों में गांवों का विकास नहीं हो सका। टाइगर रिजर्व में बसे इन गांवों में करीब डेढ़ हजार से अधिक परिवार बसे हुए हैं। विस्थापन को लेकर विभाग व सरकार की यह देरी ग्रामीण व बाघों की सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई है। हाल ही घाटी इलाके में महिला का सामना बाघ से हुआ है।

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बजट की कमी, प्रोजेक्ट एलाउंस भी नहीं
सूत्रों के मुताबिक रिजर्व में फायर लाइन, वनकर्मियों के लिए चौकियों की स्थापना समेत अन्य कार्यों के लिए हर वर्ष बजट की आवश्यकता होती है, इस वर्ष विभाग ने साढ़े तीन करोड़ के प्रस्ताव बनाकर भेजे थे, इनमें से अभी तक महज एक करोड़ रुपए मिले हैं। इसके अलावा सरकार की अनदेखी से वनकर्मियों का मनोबल भी टूट रहा है। प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्वों में वनकर्मियों को प्रोजेक्ट एलाउंस मिल रहा है, टाइगर रिजर्व के कर्मचारी इससे वंचित हैं।

बाघों की सुरक्षा महत्वपूर्ण
बाघों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। टाइगर रिजर्व का मामला काफी सेंसेटिव है। इसमें स्टाफ को लेकर सरकार को गंभीर रहना चाहिए। पर्यटन के लिए इसे खोले जाने के बाद चुनौतियां और भी बढ़ जाएंगी।
तपेश्वरसिंह भाटी, जिला सलाहकार समिति मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व


टाइगर रिजर्व से गांवों का विस्थापन महत्वपूर्ण है। सरकार को इस दिशा में गंंभीरता से विचार करना चाहिए। अभी यह काम हो गया तो बाद में मुश्किल नहीं आएगी। इससे बाघ व ग्रामीण सुरक्षित रहेंगे।
डॉ. सुधीर गुप्ता, हमलोग संस्था

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5 Oct 2019, 9:58 AM IST
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