रणथम्भौर अभयारण्‍य से मुकुंदरा टाइगर हि‍ल्‍स रि‍जर्व का ताज पहनने निकला बाघ T91, 40 किमी दूर है मंजिल
कोटा . रणथम्भौर का बिगड़ैल शहजादा T91 जल्द ही मुकुंदरा पर हुकूमत करेगा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में T91 के राज्याभिषेक की तैयारियां जोरों पर है। रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से निकलकर रामगढ़ विषधारी अभयारण्य पहुंचा बाघ T91 खुद ही मुकुंदरा की राह पर चल दिया है। वन विभाग को दिसम्बर में तीन बाघों को मुकंदरा राष्ट्रीय उद्यान में शिफ्ट करना है। इसमें टी-91 का नाम सबसे आगे है। वन विभाग की शिफ्टिंग से पहले ही उसने अपना रास्ता खुद चुन लिया। वर्तमान में बाघ रामगढ़ विषधारी अभयारण्य से भी निकलकर धीरे-धीरे मुकुंदरा की ओर बढ़ रहा है। मुकुंदरा तक पहुंचने के लिए बाघ को करीब 40 किलोमीटर का रास्ता ही तय करना है। गत वर्ष बाघ टी 91 कैलादेवी अभयारण्य के रास्ते मध्यप्रदेश के जंगलो तक भी पहुंच गया था। जानकारों का मानना है कि यह बाघ एक दिन में 60 से 70 किलोमीटर चलता है। ऐसे में कालंदा के रास्ते यह कुछ ही दिनों में मुकुंदरा में पहुंच जाएगा।
उसने नहीं चुना ब्रोकन टेल का रास्ता
बाघों के रणथम्भौर से मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान पहुंचने के दो रास्ते माने गए है। एक चम्बल नदी से होते हुए कालीसिंध नदी के रास्ते गागरोन होते हुए मुकुंदरा का रास्ता है। पूर्व आईएफएस अधिकारी वीके सालवान ने बताया कि इस रास्ते पर पहले ब्रोकन टेल व टी 35 निकली थी। इसमें से ब्रोकन टेल मुकुंदरा पहुंच गया था और टी 35 सुल्तानपुर के पास ही रुक गई थी। वहीं दूसरा रास्ता रामगढ़ अभयारण्य होते हुए हाइवे पार कर कालंदा के जंगल से होते हुए जवाहर सागर व मुकुंदरा पहुंच जाए। वर्तमान में टी 91 ने यह रास्ता पकड़ा है। यह सथूर के पास के क्षेत्र में है। विभाग को संशय है कि यह हाइवे पार कर कालंदा की ओर निकल गया है।
पहुंचा बूंदी के आबादी क्षेत्र में, फुट प्रिंट मिले
बाघ टी 91 गत 10 दिसम्बर को रामगढ़ अभयारण्य से बाहर निकलकर बूंदी के जंगलों में आ गया था। यहां से 11 दिसम्बर से इसके पगमार्क नहीं मिल रहे थे। ऐसे में विभाग की नींद उड़ी हुई थी। गत दिनों बाघ की जानकारी लेने पहुंचे मुख्य वन संरक्षक ने भी इसको लेकर काफी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद रामगढ़ अभयारण्य की टीम को भी इसकी तलाश में लगाया गया। गुरुवार को बाघ के पगमार्क बूंदी के पास ही सथूर व फूलसागर के आसपास के क्षेत्र में देखे गए। हालांकि बाघ की वास्तविक स्थिति का अब भी पता नहीं लग सका है।
टी-91 की ट्रेकिंग जारी है। बूंदी में गुरुवार को उसके पगमार्क मिले हैं। कालंदा के जंगल से मुकुंदरा अधिक दूरी पर नहीं है। बाघ किधर जाता है यह तो अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन मुकुंदरा के आसपास ही है।
घनश्याम शर्मा, मुख्य वन संरक्षक, कोटा वन्यजीव