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बाघ आने से पहले आ धमका बब्बर शेर…देखते ही थम गई सांसें! सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें एक शेर कोटा-बूंदी रोड पर घूमता हुआ बताया जा रहा है लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हुई है।
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कोटा

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Shailendra Tiwari

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Updated: 14 Dec 2017, 8:20 PM IST

Lion on Road

कोटा .

सोशल मीडिया पर एक वीडियों वायरल हो रहा है जिसमें एक बब्बर शेर कोटा-बूंदी रोड पर तालेडा बाईपास पर घूमता हुआ बताया जा रहा है लेकिन किसी विभाग ने इस बात की पुष्टि नहीं की है। क्योंकि इस इलाके में ऐसा शेर आ ही नहीं सकता।

इसके बारे में इस तरह से बताया जा रहा है कि मंगलवार रात उस समय राह चलती सभी गाडिय़ां रुक गई जब अचानक से एक बब्बर शेर सड़क पर घूमता हुआ आ गया। बड़े इत्मीनान से सड़क पर इधर-उधर टहलते हुए शेर को देख गाडिय़ां रुक गई। लोगों ने वाहनों के शीशे चढ़ा लिए। कुछ देर बाद शेर सड़क पार कर झाडिय़ों की ओट में खड़ा हो गया।

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यह सड़क कोटा-बूंदी रोड पर तालेड़ा बाइपास है। हालांकि उत्तर भारत में इस समय कहीं एशियन शेर नहीं हैं। सिर्फ गुजरात के गिर अभयारण्य में 430 बब्बर शेर हैं। वहां से जंगल-जंगल होते हुए किसी शेर का यहां तक आना नामुमकिन है।

मुकुन्दरा में होगी थर्टी फर्स्ट पार्टी
इधर, कोटा स्थित मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में दिसम्बर माह के अंतिम सप्ताह में बाघ आने वाले हैं। वन विभाग ने बाघों को लाने की तिथि भी 31 दिसम्बर तय की है। शुरुआत में मुकुन्दरा में एक नर व एक मादा बाघ लाए जाएंगे। दोनों को एनक्लोजर में छोड़ा जाएगा। कुछ दिन उनका यहां के वातावरण के अनुकूल होने का समय है। जब दोनों बाघ यहां अच्छे से एडजस्ट हो जाएंगे तो अगले साल के शुरुआती माह में एक मादा बाघिन यहां और छोड़ी जाएगी।

तैयारियां अंतिम दौर में
मुकुन्दरा में टाइगर लाने की तैयारियां इन दिनों जोर-शोर से चल रही हैं। कोटावासी भी बेसब्री से बाघों के आने का इंतजार कर रहे हैं। वन विभाग ने मुकुन्दरा में आने वाले बाघों को देखते हुए ग्रामीणों को विस्थापित करने की पूरी तैयारी कर ली है। फिलहाल वन विभाग रिजर्व की दीवार बनवा रहा है, ताकि बाघ घूमते हुए सड़क पर नहीं आ जाएं।

बाघों के खाने की पर्याप्त व्यवस्था
वन विभाग ने पिछले एक साल में यहां हरिण, चिंकारा, चीतल आदि पर्याप्त मात्रा में छोड़े हैं। पिछले दिनों कोटा चिडिय़ाघर व अजमेर से करीब 50 चीलत लाकर यहां छोड़े गए थे।