शहर में अवैध होर्डिंग्स व यूनिपोल का मामला गर्माता जा रहा हैै। इसके विरोध में राजनीतिक दबाव के साथ शहरवासी भी एकजुट होते दिखाई दिए।
शहर में लगे अवैध होर्डिंग्स व यूनिपोल को हटाने की सार्वजनिक सूचना जारी करने के बाद कार्रवाई को लेकर नगर निगम प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। दो माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही स्थानीय लोगों को भी अब ये होर्डिंग्स रास नहीं आ रहे। लोगों का मानना है कि होर्डिंग्स कई तरह के खतरों को अामंत्रण दे रहे हैं।
दो माह पहले ही दे दी थी सूचना
निगम आयुक्त की ओर से करीब दो माह पहले छतों पर लगे अवैध होर्डिंग्स हटाने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की गई थी। इसके बाद कार्रवाई के लिए निगम ने पांच टीमों का गठन किया था, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। विज्ञापन एजेन्सियों की ओर से जगह-जगह अवैध होर्डिंग्स और यूनिपोल लगा दिए गए। इसकी एवज में विज्ञापन प्रदाताओं से मोटी राशि वसूली जा रही है। निगम में कोई राशि जमा नहीं करवाई जा रही। निगम के सर्वे के अनुसार करीब 600 अवैध होर्डिंग्स व यूनिपोल लगे हैं।
मेयर व आयुक्त का करेंगे घेराव
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष अनिल सुवालका व पार्षद दिलीप पाठक ने आरोप लगाया कि भाजपा जनप्रतिनिधियों के दबाव में निगम कार्रवाई नहीं कर पा रहा। यदि निगम ने सात दिन में कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस पार्षद मेयर व आयुक्त का घेराव करेंगे। उन्होंने बिना भेदभाव के अवैध होर्डिंग्स हटाने की मांग की है। राजस्व समिति अध्यक्ष महेश गौतम लल्ली ने कहा कि राजस्व अनुभाग की ओर से अवैध होर्डिंग्स व यूनिपोल हटाने के लिए तीन-चार बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक कार्रवाई शुरू नहीं की है। पुन: इस बारे में आयुक्त से बात करेंगे।
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लोगाें को सताने लगा डर
अवैध होर्डिंग्स को लेकर नगर निगम जिस तरह लापरवाही दिखा रही है, इसे देख स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लाेगों को डर सताने लगा है कि यदि नगम ने जल्द ही कोई कार्यवाही नहीं की अौर अवैध होर्डिंग्स की संख्या बढ़ती रही तो, शहर का सौंदर्य पूरी तरह खत्म हाे जाएगा। सड़क पर गाड़ी से चलने पर इनसे ध्यान भटकता है, अौर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। लोग इन्हें जान खतरा मान रहे हैं।