कोटा

Nari Shakti Vandan Act: देश की पहली महिला जिला प्रमुख से 2.5 घंटे की अध्यक्ष तक, कोटा में ‘नारी शक्ति’ के वो रिकॉर्ड जो आज भी हैं मिसाल

Rajasthan Politics: नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बीच कोटा की सियासत में महिलाओं की भागीदारी के ऐसे रोचक और अनोखे रिकॉर्ड सामने आए हैं, जो आज भी मिसाल बने हुए हैं।

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Apr 17, 2026
रत्ना जैन और मंजू मेहरा की फोटो: सोशल मीडिया

Kota Politics Fact: केन्द्र सरकार की ओर से लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 33 फीसदी आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पेश करने की तैयारी चल रही है। इस अधिनियम के समर्थन में भाजपा की ओर से कोटा समेत देशभर में पदयात्रा समेत कई आयोजन किए जा रहे हैं।

कोटा जिले में शहरी निकायों में मुखिया की भूमिका में महिलाओं की कितनी भागीदारी रही, इसको लेकर पत्रिका ने पड़ताल की तो उजली तस्वीर सामने आई। कोटा नगर निगम के गठन से अब तक तीन महिलाओं ने मेयर की कुर्सी संभाली है। जिले की नगर पालिकाओं मे भी कई महिलाएं अध्यक्ष रही हैं। कोटा में जब दो निगम बने तब भी एक उत्तर निगम में नारी शक्ति ने मेयर की कुर्सी संभाली। वहीं देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद कोटा की नगेन्द्र बाला वर्ष 1960 में कोटा की पहली जिला प्रमुख बनी थीं। वे देश में ज़िला प्रमुख बनने वाली प्रथम महिला थीं। दो वर्ष तक जिला प्रमुख रहने के बाद नगेन्द्र बाला 1962 से 1967 तक छबडा-शाहाबाद और 1972 से 1977 तक दीगोद से विधायक रहीं।

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भाजपा से एक, कांग्रेस से रहीं दो महिला मेयर

कोटा नगर निगम में 1994 से अब तक महापौर की कुर्सी तीन महिलाएं संभाल चुकी हैं। इसमें एक भाजपा से तथा दो कांग्रेस से रही। सुमन श्रृंगी कोटा नगर निगम की पहली मेयर (महापौर) थीं, जो वर्ष 1994 से 1999 तक इस पद पर रहीं। वे भाजपा के पहले बोर्ड में नगर निगम कोटा की कमान संभालने वाली राजस्थान की भी पहली महिला मेयर थीं। वहीं डॉ. रत्ना जैन नवंबर 2009 से नवंबर 2014 तक कोटा नगर निगम की महापौर रही हैं। वे कांग्रेस से कोटा शहर की मेयर चुनी गई थीं। 2019 में कोटा, जयपुर, जोधपुर और कोटा में दो-दो नगर निगमों का गठन किया गया था। कोटा उत्तर निगम में 2020 में कांग्रेस से मंजू मेहरा महापौर बनी।

जिले में नगर पालिकाओं की स्थिति

इटावा : 2020 में भाजपा की रजनी सोनी पहली पालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुई।

सांगोद : नगर पालिका में पांच महिलाओं ने अध्यक्ष की बागडोर संभाली। इनमें सिर्फ एक कविता गहलोत ही है जिन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। बसंती बाई सुमन 27.11.2004 से 17.09.2007 तक पालिका अध्यक्ष रहीं। सावित्री प्रजापत सिर्फ एक माह 27 फरवरी 2008 से 26 मार्च 2008 तक पालिका अध्यक्ष रहीं। बसंती बाई सुमन 14 जून 2008 से 9 मार्च 2009, सीमा सोनी 9 मार्च 2009 से 26 नवम्बर 2009 तथा कविता गहलोत 25 नवम्बर 2019 से 25 नवम्बर 2025 तक इस पद पर रहीं।

सुल्तानपुर : 25 मार्च 2020 में पालिका का गठन हुआ। जिसमें हेमलता शर्मा पहली पालिका अध्यक्ष बनी।

रामगंजमंडी : पालिका का 1951 में गठन हुआ। शहीद पन्नालाल यादव की पत्नी कस्तूरी बाई के पास कुछ दिन पालिका अध्यक्ष का पद रहा। जब चुनाव हुए तो पहली पालिका अध्यक्ष संतोष गुर्जर बनी उसके बाद हेमलता शर्मा पालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुई।

कैथून : पालिका में कांग्रेस की शकीला बानो 1999 में पहली महिला अध्यक्ष बनी। इसके बाद कार्यवाहक पालिका अध्यक्ष धनकंवर भट्ट रही, फिर जैबुनिशा तथा इसके बाद दो बार आईना महक अध्यक्ष रही।

रावतभाटा : 8 महिलाओं ने संभाली कमान, ढाई घंटे की पालिका अध्यक्ष भी रहीं

1998 में रावतभाटा नगर पालिका गठन के बाद पालिका की कमान 8 महिलाओं के पास रहीं। इनमें सबसे छोटा कार्यकाल पुष्पा व्यास का रहा जो महज ढ़ाई घंटे पालिका अध्यक्ष रहीं। लीला शर्मा 2004 से 2007, पुष्पा व्यास 22 जुलाई 2007 में महज ढ़ाई घंटे पालिका अध्यक्ष रहीं। इसके बाद फिर लीला शर्मा 22 जुलाई 2007 से 16 दिसम्बर 2008, सरोज जाट दिसम्बर 2008 से फ़रवरी 2009, अन्नू शर्मा 20 फ़रवरी 2009 से 28 नवंबर 2009, दीपिका वधवा 2 अगस्त 2014 से 19 अगस्त 2014, दीपिका तिल्लानी 2019 से 2024 तथा मधुकंवर हाडा 18 जनवरी 2024 से 8 जुलाई 2024 तक पालिका अध्यक्ष रहीं।

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Published on:
17 Apr 2026 09:07 am
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