कोटा जिले के बपावर मार्ग पर स्थित परवन नदी की पुलिया के दोनों ओर सुरक्षा दीवार नहीं है। 6 वर्षों में यहां 5 घटनाएं हो चुकी हैं
मोईकलां. बपावर मार्ग पर स्थित परवन नदी की पुलिया के दोनों ओर सुरक्षा दीवार नहीं है। जबकि, 6 वर्षों में यहां 5 घटनाएं हो चुकी है। इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को यह गंभीर समस्या पर नजर नहीं आ रही।
वर्ष 2003 तक परवन नदी पर पुलिया नहीं होने से लोगों को बारां आने-जाने के लिए काफी परेशान होना पड़ता था। बारिश के समय नदी की रपट पर पानी आने से लोगों को अगस्त से जनवरी माह तक नाव के सहारे ही दूसरी पार जाना पड़ता था। लोगों की समस्या को देखते हुए पीडब्ल्यूडी ने पुलिया का निर्माण कराया लेकिन सुरक्षा दीवार की बजाए सीमेंट के पिलर बना दिए। वर्तमान में पुलिया के दोनों ओर सुरक्षा दीवार नहीं होने से बूंदी मेज नदी जैसा हादसे की आशंका बनी रहती है।
हो चुके हैं हादसे
पुलिया निर्माण के समय लोगों ने सुरक्षा दीवार बनवाने की मांग की थी। अधिकारियों ने स्वीकृति मिलने के बाद दीवार बनाने का आश्वासन दिया था, जो आज तक पूरा नहीं हो सका। सुरक्षा दीवार के अभाव में बीते छह वर्षो में चीनी से भरा ट्रक, बाइक सवार, टै्रक्टर, मिनीडोर व जीप नदी में गिर चुके है। गनीमत रही कि घटना में किसी की जान नही गई। जब-जब घटनाए हुई तो सुरक्षा दीवार बनाने की मांग उठी लेकिन समाधान नहीं हुआ।
कलक्टर को सौंपी थी लिखित शिकायत
सुरक्षा दीवार की मांग को लेकर ग्रामीणों ने 3 जुलाई 2016 को कोटा व बारां पहुंचकर जिला कलक्टर व पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को लिखित में शिकायत सौंप समाधान की मांग की थी। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के तुलसा आगमन पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रदीप मेरोठा व गांववासियों ने समस्या से अवगत कराया था। उस समय राजे ने सुरक्षा दीवार बनवाने का आश्वासन दिया था। विधानसभा चुनाव से पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की पैदल यात्रा के दौरान भी लोगों ने पुलिया का अवलोकन कराया था।
अटरू प्रधान अजय सिंह हाड़ा ने भी परवन नदी की पुलिया पर सुरक्षा दीवार निर्माण को लेकर बारां के सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को समस्या बताई थी। वर्तमान में पुलिया पर 30 से 40 फीट की परिधि में पिलर ही नही बचे हैं। कई बार वाहनों के टकराने से पिल्लर टूट चुके हैं। सरपंच रवि कुमार गुप्ता व रघुराज सिंह ने बताया कि परवन नदी की पुलिया बारां व कोटा जिले की सीमा में आती है। ऐसे में दोनों जिले के अधिकारियों को समय रहते पुलिया पर सुरक्षा दीवार का निर्माण कराना चाहिए।