कोटा

बेटी का नाम बदलते ही मां-बाप पर टूट पड़ा मुसीबतों का पहाड़, जानिए, क्या-क्या हुए सितम, पढि़ए पूरी कहानी…

दस साल पहले जिस बालिका का अपहरण हुआ अब उसका नाम बदल गया है। और, अब यही बदला नाम परिजनों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
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Dec 02, 2018
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बेटी का नाम बदलते ही मां-बाप पर टूट पड़ा मुसीबतों का पहाड़, जानिए, क्या-क्या हुए सितम, पढि़ए पूरी कहानी...

सांगोद/कुंदनपुर. थूनपुर गांव से दस साल पहले जिस बालिका का अपहरण हुआ अब उसका नाम बदल गया है। और, अब यही बदला नाम परिजनों और पुलिस के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। अभी वह कोटा नारीशाला में है लेकिन उसे वापस लाने के लिए परिजनों के पास कोई दस्तावेज नहीं। बिना दस्तावेज नारीशाला से उसे घर लाने में परिजनों और पुलिस के सामने कई दिक्कतें हैं। ग्रामीणों के मतदान के बहिष्कार की चेतावनी देने के बाद पुलिस मामले का हल निकालने में जुटी है।

उल्लेखनीय है कि करीब दस साल पूर्व थूनपुर गांव में मजदूरी करने आया एक शख्स तत्समय 8 वर्षीय बालिका का अपहरण करके ले गया। वर्ष 2008 में सांगोद पुलिस थाने में अपहरण का मामला भी दर्ज हुआ। ऐसे में पुलिस भी बीते दस साल से मामले के निस्तारण में लगी थी। कुछ माह पूर्व पुलिस को उसके मध्यप्रदेश के एक गांव में होने की जानकारी मिली। मशक्कत के बाद पुलिस उसे मध्यप्रदेश से कोटा ले आई। लेकिन, इन दस साल में वह बच्ची युवती बन गई और नाम भी बदल गया। परिजनों के पास बालिका के कोई दस्तावेज नहीं है। ऐसे में नारीशाला संचालक भी उसे परिजनों के सुपुर्द करने में पीछे हट रहे हैं।

अब यही उपाय
जानकार सूत्रों का कहना है कि पीडि़ता के 164 के बयान के आधार पर उसकी सुर्पूदगी हो सकती है। बिना दस्तावेज उसकी उम्र साबित नहीं हो पा रही। ऐसे में मेडिकल जांच ही उपाय है। मेडिकल में बालिग साबित होने पर 164 के बयान के आधार उसे उसकी इच्छा पर सुपुर्द किया जा सकता है। हालांकि डीएनए टेस्ट से भी इसकी पुष्टि हो सकती है। लेकिन इसमें भी काफी समय लगता है।

पुलिस पीडि़ता को घर लाने का पूरा प्रयास कर रही है। उसके दस्तावेज नहीं होने से काफी परेशानी आ रही। फिर भी कोशिश है कि कोई हल निकाला जा सके।
महेन्द्र मीणा, थानाधिकारी

Published on:
02 Dec 2018 09:51 pm